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डर के साए में जीने वाली बालिका वधू ने जीती जंग, रद्द करवाई अपनी शादी

Sat, 10 Feb 2018 12:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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19 साल की पिंकी तंवर ने बाल विवाह के खिलाफ अपनी जंग जीत ली है। इस मामले में उनकी मदद जोधपुर की एक वेलफेयर ट्रस्ट ने की। वह पिछले एक दशक से डर के साए में जी रही थी। उनके ससुरालवालों ने कथित तौर पर उनका अपहरण करने की भी कोशिश की थी। हालांकि पड़ोसियों की मदद से वह बच गई। पिछले हफ्ते एक पारिवारिक अदालत ने उनकी शादी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उनके ऊपर इस शादी को थोपा नहीं जा सकता है।

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पिंकी अलवर जिले के थानागाजी की रहने वाली है। इस समय उनकी उम्र 19 साल है। तंवर की शादी 10 साल की उम्र में दौसा के रहने वाले हिम्मत सिंह से कर दी गई थी। बालिका वधू के तौर पर उन्हें मानसिक पीड़ा सहनी पड़ी जब उनके पति घर आकर उनके परिवार से बार-बार गौना करने के लिए कहते थे। जब पिंकी की मां मीरा देवी को जोधपुर बेस्ड सारथी ट्रस्ट के बाल विवाह विरूपण अभियान के बारे में पता चला तो उन्होंने उससे मदद मांगी। इस दौरान पिंकी के ससुरालवालों ने उन्हें किडनैप करने की कोशिश की।

सारथी की मैनेजिंग ट्रस्टी डॉक्टर कीर्ति भारती ने पिंकी को जोधपुर बुलाया और उसे सुरक्षा प्रदान की। इसके बाद उन्हें पूर्व-शिक्षक पात्रता परीक्षा दिलवाई जिसे वह पास कर चुकी हैं। पिंकी को अब एक कॉलेज में एडमिशन मिल गया है जहां से वह बीएड कर रही हैं। भारती की मदद से पिंकी ने जोधपुर की पारिवारिक अदालत में अपनी शादी रद्द करने की याचिका दायर की थी।
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डॉक्टर भारती पिंकी की तरफ से कोर्ट के सामने पेश हुईं। उन्होंने तंवर की उम्र और जबरन शादी के सबूत से संबंधित दस्तावेज कोर्ट में जमा करवाए। 31 जनवरी को पारिवारिक अदालत की जज रेखा भार्गव ने बाल विवाह अधिनियम, 2006 के तहत आदेश जारी करते हुए पिंकी की शादी रद्द करने के साथ ही अवैध करार दे दी। पिंकी का कहना है कि अब मेरी कथित शादी खत्म हो चुकी है और मैं खूब पढ़ाई करके टीचर बनूंगी।

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