कांग्रेस की युवा ब्रिगेड धीरे-धीरे बिखरने लगी है। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया..फिर जितिन प्रसाद और अब सचिन पायलट के छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। बृहस्पतिवार को राजस्थान में सचिन पायलट ने अपने घर पर आठ विधायकों के साथ बैठक की। सके बाद उनके समर्थक विधायकों ने कहा कि यदि पंजाब के असंतुष्ट संकट का हल 10 दिन में निकल सकता है तो हमारा क्यों नहीं?
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नाराज चल रहे हैं। साथ ही पार्टी आलाकमान से भी वो खफा हैं। बैठक के बाद पायलट समर्थक विधायक मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया आदि ने कहा कि कोरोना काल में किए गए कामों और पार्टी के कल होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पायलट कांग्रेस के साथ और और हम सचिन पायलट के साथ हैं, लेकिन आलाकमान को हमारी भी सुननी चाहिए। जब पंजाब में विधायकों की समस्याओं का हल 10 दिन में हो सकता है तो राजस्थान में देर ठीक नहीं है।
दरअसल, राजस्थान में सियासी सरगर्मी तेज होने के पीछे मुख्य वजह सचिन पायलट का बयान है। राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र राठौड़ ने कांग्रेस में कथित तौर पर बढ़ते असंतोष का हवाला देते हुए ट्वीट किया , जिसपर पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट ने उन्हें अपनी पार्टी की आंतरिक कलह देखने की नसीहत दे दी। राठौड़ ने ट्वीट किया,'आखिर मन का दर्द होंठों पर आ ही गया। ये चिंगारी कब बारूद बनकर फूटेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने अहम भूमिका निभाई थी। सुलह कमेटी के पास मुद्दे अब भी अनसुलझे ही हैं। न जाने कब क्या हो जाए।'