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CISF: जम्मू-कश्मीर की भलवाल सेंट्रल जेल के बाद अब इन 5 जेलों की सुरक्षा होगी सीआईएसएफ के हवाले

Sun, 21 Jun 2026 06:24 PM IST
Rahul Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीआईएसएफ - फोटो : एएनआई
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जम्मू-कश्मीर की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) अब केंद्र शासित प्रदेश की अन्य जेलों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाने जा रहा है। यह फैसला श्रीनगर की सेंट्रल जेल और जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल में सीआईएसएफ के 'आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी (आईएसडी) मॉडल' की शानदार सफलता के बाद लिया गया है।
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वर्तमान सफलता और सुरक्षा का नया ढांचा 
सीआईएसएफ ने 3 अक्टूबर 2023 को श्रीनगर सेंट्रल जेल और 19 अक्टूबर 2023 को जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल की सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। तब से लेकर अब तक, बल ने प्रशिक्षित जवानों और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम की मदद से इन संवेदनशील जेलों की भीतरी और बाहरी सुरक्षा को अभेद्य बनाया है। पहले इन जेलों में कैदियों तक संचार उपकरण (मोबाइल, सिम कार्ड) और नशीले पदार्थ पहुंचाने की कई कोशिशें होती थीं। सीआईएसएफ की तैनाती के बाद से, एक सख्त और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र लागू किया गया है, जिसने सुरक्षा में सेंधमारी और तस्करी पर पूरी तरह से लगाम लगा दी है। 

इन पांच जेलों की सुरक्षा होगी सीआईएसएफ के हवाले 
वर्तमान मॉडल की प्रभावशीलता को देखते हुए, अब पूरे जम्मू-कश्मीर में एक समान और पेशेवर सुरक्षा ढांचा तैयार करने के लिए सीआईएसएफ की सुरक्षा छतरी का विस्तार किया जा रहा है। 
  1. -उच्च सुरक्षा जेल, महानपुर (कठुआ)
  2. -जिला जेल, जम्मू
  3. -जिला जेल, अनंतनाग
  4. -जिला जेल, कुपवाड़ा
  5. -जिला जेल, बारामूला
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आधुनिक तकनीक और सख्त चेकिंग  
आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कैदियों वाली इन उच्च सुरक्षा जेलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीआईएसएफ अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है। इनमें नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर, जिनकी मदद से छिपे हुए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का पता लगाया जा सकता है। डुअल-व्यू एक्स-रे बैगेज सिस्टम से सामान की बारीकी से जांच की जा सकती है। हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर के द्वारा सभी एंट्री प्वाइंट पर सघन तलाशी ली जाती है। 

मोबाइल बुलेट प्रूफ व्हीकल तैनात  
जेल की दीवारों के ऊपर से सामान फेंकने की घटनाओं (जो कि आपराधिक नेटवर्क का एक आम तरीका है) को रोकने के लिए मोबाइल बुलेट प्रूफ व्हीकल तैनात किए गए हैं। क्विक रिएक्शन टीम 24 घंटे गश्त कर रही है। इसके अलावा, जेल में आने-जाने वाले हर व्यक्ति—चाहे वह कैदी हो, आगंतुक, जेल का स्टाफ या खुद सुरक्षाकर्मी, की बिना किसी समझौते के कड़ी चेकिंग की जाती है।
सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लेने के लिए सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 8 जून को श्रीनगर सेंट्रल जेल का दौरा किया था। उन्होंने जेल अधिकारियों के साथ चर्चा में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक-आधारित निगरानी को ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया।

जेल सुरक्षा होगी और ज्यादा हाई-टेक 
  • -आने वाले समय में जेल सुरक्षा को और हाई-टेक बनाने के लिए कई बड़े अपग्रेड्स की योजना है।  
  • -रियल-टाइम निगरानी के लिए एआई-सक्षम सीसीटीवी सिस्टम और एडवांस्ड वीडियो एनालिटिक्स।
  • -सर्विलांस और एक्सेस कंट्रोल के लिए एक एकीकृत कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम।
  • -सुरक्षाबलों के लिए कैदियों की प्रोफाइलिंग, व्यवहार विश्लेषण और एंटी-सबोटाज उपायों का विशेष प्रशिक्षण।
यह प्रस्तावित विस्तार और आधुनिकीकरण के प्रयास, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में सीआईएसएफ की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। प्रशिक्षित मैनपावर और आधुनिक तकनीक के सटीक तालमेल से सीआईएसएफ एक सुरक्षित और बेहतरीन जेल प्रबंधन व्यवस्था तैयार कर रहा है, जो आने वाली किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
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