महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी में हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। जिसमें करीब 27 लोग मारे गए थे और 57 अभी भी लापता हैं। एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में भूस्खलन की आशंका वाले 103 गांवों से लगभग 7,000 लोगों को 51 शिविरों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
रायगढ़ में रेड अलर्ट जारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए भारी बारिश की आशंका जताई है और इसके लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं अब कोई त्रासदी न हो इसके लिए 2,040 परिवारों के कुल 6,968 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि 177 परिवारों के 534 लोगों ने अपने रिश्तेदारों के साथ रहने का विकल्प चुना है।
उन्होंने आगे कहा कि 1,863 परिवारों में से 6,434 लोगों को 51 शिविरों में रखा गया है। अलीबाग के 31 परिवारों के 128 व्यक्ति भी इसमें शामिल हैं। साथ ही पेन के 285 व्यक्ति,खालापुर के 236 परिवारों के 825 व्यक्ति और महाड में 2,810 लोगों को स्थानांतरित किया गया है।
नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रहीं
अधिकारी ने बताया कि रायगढ़ जिले में पिछले 24 घंटों में 162.3 मिमी बारिश हुई और इस मानसून में वार्षिक औसत की 67 फीसदी बारिश हुई है। जिले की सभी छह नदियाँ, सावित्री (महाड), अंबा (रोहा), कुदालिका (रोहा), पातालगंगा (खलापुर), उल्हास (कर्जत) और गढ़ी (पनवेल) वर्तमान में खतरे के स्तर से नीचे बह रही हैं।
बारिश के कारण 50 से ज्यादा घर हो गए नष्ट
एक जिला अधिकारी ने कहा कि संयोग से, राज्य सरकार ने इस सप्ताह पोलादपुट तालुका में कर्नाले और सखार सुतार वाडी गांवों के पुनर्वास के लिए 3.95 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की, यहां दो साल पहले भूस्खलन में 11 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारी बारिश के कारण जिले में 56 घर नष्ट हो गए हैं और 336 घरों को आंशिक क्षति हुई है।