देश के आधे से ज्यादा हिस्से भयानक बाढ़ का कहर झेल रहे हैं और हालात कुछ ऐसे है कि अब तक 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। चौंका देने वाली बात है कि अकेले असम में बाढ़ की वजह से करीब 53 लोगों की मौत हो चुकी है। राजस्थान का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां नदियों और नालों का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार में भी नदियां अपने स्तर से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। सूत्रों के मुताबिक यहां पानी के गड्ढे में डूबने से 5 बच्चों की मौत हो गई है।
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को बताया कि राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे 20 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने बताया कि काजीरंगा नेशनल पार्क का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा है। जानवरों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन ने हाइवे पर वाहनों की गति सीमा पर अंकुश लगाया है। वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म ने बताया कि शुक्रवार को भी पार्क में एक गैंडे की मौत हो गई।
देश के पूर्वोत्तर में भी बाढ़ का आतंक थम नहीं रहा है। अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी बाढ़ व भारी बारिश के चलते जगह-जगह जमीन धंसने की घटनाएं हुई हैं। बीते 11 जुलाई को हुए भूस्खलन में अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले के लापटाप गांव में कई घर बह गए थे जिसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी। काजीरंगा नेशनल पार्क में भी पानी भर गया है जिससे एक सींग वाले तीन गैंडों समेत पचास से ज्यादा जानवरों की मौत हो चुकी है।