सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अकाली नेता कुलवंत सिंह भाट को पहले बीजेपी में लाकर कोर कमेटी में शामिल कर लिया गया था। उस समय भी पार्टी के पुराने सिख नेताओं की उपेक्षा हुई थी।
कुछ समय बाद प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से हुए विवाद के बाद कुलवंत सिंह भाट ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अब जब कि दिल्ली विधानसभा चुनाव करीब आ गए हैं, कुलवंत सिंह भाट एक बार फिर बीजेपी में एंट्री करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पुराने सिख नेता एक बार फिर असहज हो हए हैं।
अपने नेताओं की हो रही उपेक्षा से नाराज सिख प्रकोष्ठ के नेता कुलदीप सिंह ने केंद्रीय मंत्री और सिख नेता हरदीप सिंह से मुलाकात कर मामले की पूरी जानकारी दी। उन्होंने सिख नेताओं की शिकायत केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही।
अब हरदीप सिंह पूरी और कुलदीप सिंह ने दिल्ली का चुनाव प्रभार देख रहे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलने का वक्त मांगा है जिससे सिख नेताओं की नाराजगी दूर की जा सके। जानकारी के मुताबिक़ प्रकाश जावड़ेकर ने दोनों नेताओं से मिलकर समस्या का हल निकालने की बात कही है।
दिल्ली में सिख समाज काफी प्रभावशाली है। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से कुछ को छोड़कर वह शेष सभी पर अपनी मजबूत उपस्थिति और काफी हद तक चुनाव परिणाम प्रभावित करने की भी क्षमता रखता है।
इनमें राजौरी गार्डन, तिलकनगर, हरिनगर, तिमारपुर, चांदनी चौक, गांधीनगर और राजेंद्र नगर ऐसी सीटें हैं। जहां सभी राजनीतिक दल सिख समाज का उम्मीदवार उतारने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इन इलाकों में सिख और पंजाबी समुदाय के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं। इन सीटों का चुनाव परिणाम सिख और पंजाबी समुदाय ही तय करते हैं।