भारत की तरफ से अपने मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को पूरी तरह सफल बनाने के लिए फ्रांस के बाद अब रूस से भी मदद लेने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल दोनों देशों के बीच ग्लोनास (रूसी जीपीएस) और नाविक (भारतीय जीपीएस) के लिए एक-दूसरे के यहां ग्राउंड स्टेशन बनाने पर वार्ता की जा रही है।
इस वार्ता के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले महीने मास्को जा रही हैं, जहां गगनयान के लिए सहयोग पर भी चर्चा होगी। मिशन-2022 के लिए रूस को भारतीय अंतरिक्षयात्रियों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बारे में इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी वर्ष 2015 में एक एमओयू पर भी हस्ताक्षर कर चुके हैं।
नया नहीं है भारत-रूस का साथ
भारत का अंतरिक्ष के सफर में रूस का साथ करीब 4 दशक पुराना है। वर्ष 1975 में भारत की पहली अंतरिक्ष सेटेलाइट ‘आर्यभट्ट’ को रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने ही अपने विमान सोयुज की मदद से अंतरिक्ष में स्थापित कराया था। इसके बाद भारत के इकलौते अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को भी वर्ष 1984 में रूस ने ही अंतरिक्ष में अपने यान से भेजा था।