फोरेंसिक इंवेस्टिगेशन के लिए आगरा से भेजी गई फील्ड यूनिट, क्राइम सीन से जुटाए अहम सुबूत
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
मथुरा के जवाहर बाग का सच फोरेंसिक इंवेस्टिगशन से सामने आ सकता है। आगरा से गई एक्सपर्ट की टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया है। क्राइम सीन के हर एंगिल से फोटो लिए गए हैं। राख के ढेर से सैंपल जुटाए गए हैं। कई जगह मिट्टी खून से सनी मिली है। इन सभी की फोरेंसिक लैब में जांच होगी। बता दें, कब्जाधारियों की मौत दो तरह से हुई है। कई गोली लगने से मरे हैं तो कई आग में जलने से। फोरेंसिक एक्सपर्ट मालूम करेंगे कि यह परिस्थिति कैसे बनी। इसी तरह क्राइम सीन पढ़कर अंदाजा लगाया जा रहा है कि पुलिस वालों की जान कैसे गई। फील्ड यूनिट के सूत्रों ने बताया कि मेन गेट से एक किलोमीटर अंदर की तरफ एक जगह दीवार टूटी हुई है। इसके ठीक सामने टूटा हुआ हेलमेट पड़ा है।
इसे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी का बताया गया है। आठ बॉडी प्रोटेक्टर टुकड़े-टुकड़े हुए मिले हैं। इस सभी के फोटो कराए गए हैं। एक प्रोटेक्टर खून से सना है। यह भी मुकुल द्विवेदी का ही माना जा रहा है। उन पर फरसे से हमला किया गया था। बाद में पत्थर से सिर पर वार किए गए। कई जगह चप्पल बिखरी पड़ी हैं। इससे पता चल रहा है कि कब्जाधारी किस दिशा में भागे। दीवार तोड़कर जो रास्ता बनाया गया, उससे भी कई कब्जाधारी भागे थे। बता दें, पुलिस और कब्जाधारियों के संघर्ष के दौरान झोंपड़ियों में आग लग गई थी। पुलिस का कहना है कि आग कब्जाधारियों के नेतारामवृक्ष यादव ने ही लगाई। इसी में गिरकर कई कब्जाधारी मरे।
टहनियों से लिए फिंगर प्रिंट
कब्जाधारियों ने पेड़ों पर चढ़कर गोलियां चलाई थीं। इस जानकारी पर फोरेंसिक एक्सपर्ट ने पेड़ों की टहनियों से फिंगर प्रिंट लिए हैं। कई जगह कारतूसों के खोखे पड़े मिले। इनसे अंदाजा लगाया जा रहा है कि गोली किस दिशा से चली। कारतूसों के बोर भी देखे जा रहे हैं। इससे साफ होगा कि पुलिस किस ओर थी और कब्जाधारी किस तरफ।
बैलेस्टिक टेस्ट भी होगा अहम
शवों से मिली गोलियां आगरा फोरेंसिक साइंस लैब भेजी जाएंगी। इनके बोर देखे जाएंगे। इनसे पता चलेगा कि कौन किस बोर के असलाह से मरा। पुलिस को जांच करके बताना होगा कि एसओ फरह संतोष यादव को गोली किस असलाह से चली। इसके बरामद होने पर इसे भी परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा जाएगा।