डोकलाम में चीन के साथ लंबे खिंचे गतिरोध के बाद रक्षा मंत्रालय ने सभी विवादित क्षेत्रों समेत 4,000 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर आधारभूत ढांचा निर्माण का काम तेज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सेना की कुछ महत्वपूर्ण फार्मेशन में संगठनात्मक बदलाव होने के भी संकेत हैं।
सेना की कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान ये फैसले लिए गए। इस कांफ्रेंस में डोकलाम को लेकर चीन के साथ चले गतिरोध पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही उत्तरी सीमा की सभी सुरक्षा चुनौतियों का विश्लेषण किया गया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
हफ्ते भर लंबी इस कांफ्रेंस के दौरान सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कमांडरों से किसी भी परिस्थिति के लिए ‘हर समय’ तैयार रहने को कहा है। वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘दुश्मन ताकतों’ के विरुद्ध सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस कांफ्रेंस में अन्य लोगों के अलावा रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
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स्टाफ ड्यूटी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विजय सिंह ने कांफ्रेंस की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तरी क्षेत्र मे भारी पैमाने पर सड़क निर्माण गतिविधियों चलाने का फैसला लिया गया है। क्षमता विस्तार के लिए कुछ फार्मेशन में संगठनात्मक बदलाव के मुद्दे की भी जांच-परख की गई। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय की इकाई सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को अतिरिक्त फंड देने का फैसला किया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत-चीन सीमा पर कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान खास जोर दिया गया। विवादित क्षेत्रों समेत चीन से सटी समूची सीमा पर आधारभूत ढांचे के निर्माण को तेज करने का फैसला किया गया है। अपने संबोधन में रक्षामंत्री सीमारमण ने ‘बाहरी और आंतरिक खतरों’ से निपटने के लिए तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देने पर सेना की प्रशंसा की। इसे डोकलाम में चीनी सेना के सड़क निर्माण कार्य को रुकवाने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों से जोड़कर देखा जा रहा है।