नोटबंदी के बाद व्यवस्था में आए 2,000 और 500 के नोट से देशभर में वित्तीय संस्थानों और बैंकों द्वारा 14 लाख से अधिक संदिग्ध लेनदेन की गतिविधियां (सस्पिशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट) दर्ज की गईं। वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहले के आंकड़ों से 1,400 फीसदी अधिक होने के साथ अबतक के सर्वाधिक स्तर पर हैं।
मनी लान्ड्रिंग से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के साथ आतंकी वित्तपोषण और कर चोरी से जुड़े गंभीर लेनदेन की जांच करने वाली एजेंसी एफआईयू ने वर्ष 2017-18 के ऐसे मामलों के आंकड़े जुटाए हैं, जिनमें नकली मुद्रा जमा करने के मामले भी शामिल हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाली एफआईयू द्वारा एक दशक पहले सस्पिशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट (एसटीआर) के आंकड़े सालाना आधार पर जुटाने शुरू किए गए थे, जिसके बाद से इस वर्ष के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। बैंक और वित्तीय संस्थानों ने 2017-18 में भी नोटबंदी के दौरान हुए भुगतानों की जांच जारी रखी, जिससे एफआईयू को 14 लाख से अधिक एसटीआर मिली।
एफआईयू के निदेशक पंकज कुमार मिश्रा ने कहा कि यह आंकड़े 2016-17 के आंकड़ों से लगभग तीन गुना अधिक है, जबकि नोटबंदी के पहले के आंकड़ों से लगभग 14 गुना अधिक हैं। सरकार को दी गई रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि 2016-17 में 4,73,006 एसटीआर दर्ज की गईं थी।