दिल्ली के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुंबई फतह की तैयारी में हैं। इसलिए आम आदमी पार्टी (आप) ने एशिया की वैभवशाली बीएमसी पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। अगले साल बीएमसी चुनाव होने वाले हैं। इसके मद्देनजर पार्टी मुंबई में चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गई है।
आम आदमी पार्टी ने मुंबई में बीएमसी की सत्ता हासिल करने के लिए लक्ष्य 2022 पर अपना पूरा जोर लगाया है। इसके लिए केजरीवाल ने अपनी कोर टीम के अक्षय मराठे जैसे मराठी मूल के नेताओं को मुंबई की जिम्मेदारी सौंपी है। एक दिन पहले दिल्ली में आप की विधायक आतिशी का मुंबई दौरा इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने दिल्ली का आर्थिक मॉडल मुंबई में लागू करने की घोषणा की है।
आतिशी का कहना है कि बीएमसी में विपक्ष है ही नहीं। सब सत्ताधारी हैं। तकनीकी रूप से कांग्रेस भले ही विपक्ष में है लेकिन वह शिवसेना का सहयोगी दल है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों मुंबई वासियों को छल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी अस्पताल, शिक्षा और स्वच्छता आदि बुनियादी मुद्दों को चुनावी मुहिम का हिस्सा बनाएगी और पूरी तैयारी के साथ बीएमसी के चुनाव में उतरेगी।
227 वार्डों में चुनाव लड़ने की तैयारी
मुंबई में पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि बीएमसी चुनाव के लिए आप की तरफ से रोडमैप तैयार किया जा रहा है। पार्टी ने बीएमसी की सभी 227 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पहले से पार्टी के वॉलंटियरों से आवेदन भी मंगाए हैं। इसके अलावा मुंबई में जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाने के लिए पार्टी अन्य दल के उम्मीदवारों को भी पार्टी में शामिल करेगी।
कोंकण अकादमी के गठन कर केजरीवाल ने दिया बड़ा संदेश
दिल्ली में कोंकण अकादमी की स्थापना कर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मुंबई को बड़ा संदेश दिया है। यह दरअसल, शिवसेना के कोर वोट बैंक पर सेंध लगाने की कोशिश है। कोंकणी भाषा भले ही गोवा की अधिकृत भाषा है, लेकिन मुंबई के आसपास रत्नागिरी, सिंधु दुर्ग और रायगढ़ आदि जिलों में यह भाषा बोली जाती है। मुंबई में कोंकण के लोग सबसे ज्यादा हैं। इन्हीं के बल पर शिवसेना बीते 25 साल से भी अधिक समय से बीएमसी की सत्ता में है। जानकार मानते हैं कि आप ने इन कोंकण के मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए ही दिल्ली में कोंकण अकादमी की स्थापना की है।