‘साइकिल’ की सवारी अखिलेश करेंगे या मुलायम सिंह यादव या दोनों के हाथ नहीं लगेगी साइकिल। चुनाव आयोग अगले चंद दिनों में इसका निपटारा कर देगा, लेकिन साइकिल की जंग आगे भी जारी रह सकती है। कानूनी विशेषज्ञों की माने तो दोनों ही पक्षों के पास अदालत जाने का विकल्प खुला है और वे इसका इस्तेमाल भी करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग का फैसला जो भी हो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरएस सोढ़ी के मुताबिक, चुनाव आयोग के फैसले के बाद असंतुष्ट पक्ष के पास हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का विकल्प मौजूद है। चूंकि चुनाव नजदीक है इसलिए असंतुष्ट पक्ष को कितनी राहत मिल पाती है, ये देखने वाली बात होगी।
पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल व वरिष्ठ वकील विकास सिंह के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के दोनों खेमों के पास चुनाव आयोग से आगे का भी रास्ता खुला हुआ है। आयोग के फैसले को कोई भी पक्ष अदालत में चुनौती दे सकता है।