श्री कल्कि धाम के शिलान्यास को लेकर छिड़े विवाद पर कल की सियासत गर्मा सकती है क्योंकि कांग्रेसी दिग्गजों के साथ रामजन्म भूमि आंदोलन के नेता पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती और सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भी प्रस्तावित मंदिर निर्माण को समर्थन दिया है।
संभल के ऐंचोड़ा कंबोह में श्री कल्कि धाम में 200 करोड़ से अधिक की लागत से श्री कल्कि मंदिर प्रस्तावित है। मंदिर का शिलान्यास 7 नवंबर को होना था। शिलान्यास करने के लिए कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे कांग्रेसी दिग्गज आए थे लेकिन प्रशासन की पाबंदी के बाद शिलान्यास अटक गया है। सियासी दिग्गजों और चुनिंदा संतों ने श्री कल्कि मंदिर के मॉडल का लोकार्पण किया है। संत समाज के साथ साथ राजनीतिक दिग्गजों ने प्रशासन की पाबंदी का विरोध किया है।
जिस मंच पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सदस्य डा. संजय सिंह कल्कि मंदिर के शिलान्यास पर पाबंदी को लेकर तीखे तेवर दिखा रहे थे उसी मंच पर सपा के शिवपाल सिंह यादव भी थे, उनसे कांग्रेसी दिग्गजों ने सवाल किया कि अपनी जमीन पर कोई मंदिर बना रहा है तो उस पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है।
वहीं भाजपा के पूर्व सांसद और रामजन्म भूमि आंदोलन के नेता डा. रामविलास वेदांती प्रदेश सरकार पर सियासी तीर चलाए। जिसका जवाब शिवपाल सिंह यादव ने मंच से दिया। जब सपा सरकार को घेरा गया तो उन्होंने उन्होंने कहा कि भाजपा की दो बार सरकार बनी लेकिन अयोध्या का राम मंदिर नहीं बनवा सके। लेकिन कल्कि मंदिर के शिलान्यास पर पाबंदी के बाद भी शिवपाल सिंह यादव का यहां आना सियासी हलकों में काफी अहम माना जा रहा है। वो भी तब जब प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेटे एक लेटर बम फोड़कर एक बड़े भाजपा नेता से उनकी मुलाकात पर सवाल खड़ा कर चुके हैं।
आयोजक श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं और कांग्रेस से उनकी दोस्ती जग जाहिर है। इस मामले में विवाद के बाद सपा के दिग्गज नेता का आना प्रदेश की सियासत को कुछ नए मोड़ देने के इशारे भी करता है।