आखिरकार 87 साल बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अमल में आ गया। चिकित्सा शिक्षा और डॉक्टरों की शीर्ष नियामक संस्था एनएमसी ने शुक्रवार को 1933 में स्थापित भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) का स्थान लिया है, जिसे अब पूरी तरह से भंग कर दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली एम्स के वरिष्ठ डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा को एनएमसी का पहला अध्यक्ष बनाया गया है। इनका कार्यकाल तीन साल का होगा। इनकी निगरानी में चार स्वायत्त बोर्ड होंगे, जो स्नातक व स्नातकोत्तर (यूजी व पीजी) की चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा मूल्यांकन, रेटिंग और नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण को लेकर फैसले लिया करेंगे। वहीं, एमसीआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के महासचिव रहे राकेश कुमार वत्स को अब आयोग का महासचिव बनाया गया है।
निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटी में 50 फीसदी सीटों पर शुल्क नियंत्रण का नियम
इसी के साथ ही देश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी में चिकित्सा शिक्षा की 50 फीसदी सीटों पर शुल्क नियंत्रण नियम भी लागू हो चुका है। जानकारी के मुताबिक जल्द ही एनएमसी नर्सिंग व पैरा मेडिकल कोर्स से जुड़ी शिक्षा को लेकर भी नए दिशा-निर्देश तैयार कर सकता है। 33 सदस्यों वाले एनएमसी के तहत चार स्वायत्त बोर्ड हैं।
इनमें से अहमदाबाद के डॉ. अरुणा वानिकर, बंगलूरू के डॉ. एमके रमेश, दिल्ली के डॉ. अचल गुलाटी और बंगलूरू निम्हांस के डॉ. बीएन गंगाधर को बोर्ड अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा देश के अलग अलग स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों के कुलपति को भी एनएमसी का सदस्य नियुक्त किया गया है। फरीदकोट, रोहतक, हिमाचल प्रदेश इत्यादि इसमें शामिल हैं।