पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में राजस्व वसूली में सुधार के साथ आने वाले समय में कर की सिर्फ दो दरें रह सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 12 फीसदी और 18 फीसदी की दर का विलय का एक किया जा सकता है।
जेटली ने कहा है कि जीएसटी के लिए राज्यों को राजी करना सबसे कठिन काम था, लेकिन पांच वर्षों तक उनकी आय में इजाफे का वादा करने के बाद सभी को साथ लाया जा सका। अब दो साल बाद जीएसटी के आंकड़े सबके सामने हैं, जो दिखाते हैं कि 20 से ज्यादा राज्यों के राजस्व में 14 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हो रही है। अब इन राज्यों के लिए अलग से फंड जारी करने की जरूरत नहीं होती है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी ने सरकारों को ही नहीं, बल्कि ग्राहकों पर भी कर का बोझ काफी कम किया है। पहले वस्तुओं पर 17 तरह के अप्रत्यक्ष कर लगते थे। इसमें वैट 14.5 फीसदी, एक्साइज ड्यूटी 12.5 फीसदी सहित कई कर शामिल थे और इन कर पर भी कर लगता था, जिससे ग्राहकों को 31 फीसदी तक टैक्स चुकाना पउ़ता था। जीएसटी आने के बाद अधिकतम कर 28 फीसदी रह गया है, जो सिर्फ गिने-चुने विलासिता वाली या अहितकर वस्तुओं पर देना पड़ता है।