आतंकवाद को संरक्षण और शह देने के मसले पर भारत और अफगानिस्तान ने रविवार को 40 देशों के सम्मेलन हार्ट ऑफ एशिया में पाकिस्तान को जमकर कोसा और आतंकियों तथा उनके आकाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की। पाकिस्तान को साफ संदेश दिया गया कि वह लश्करे ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों की शरणस्थली को तत्काल नष्ट करे।
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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने जहां सीधे तौर पर कहा कि हमें 500 करोड़ डॉलर की मदद देने के बजाय पाकिस्तान इसका इस्तेमाल आतंकवाद के खात्मे के लिए करे, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि खामोशी और निष्क्रियता बरतने से आतंकियों और उनके आकाओं का हौसला ही बढ़ेगा।
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में गनी ने कहा कि बेहतर होगा कि अफगानिस्तान को पुनर्निर्माण के नाम पर 500 करोड़ डॉलर देने के बदले पाकिस्तान इस रकम का इस्तेमाल आतंकवाद के खात्मे के लिए करे। गनी ने सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान से हिसाब भी मांगा और उस पर तालिबान सहित कई आतंकी नेटवर्कों को संरक्षण देेकर अपने देश में ‘अघोषित युद्ध’ छेड़ने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया,‘युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में भारत के सहयोग का कोई गुप्त समझौता नहीं हुआ है।
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एशियाई या अंतरराष्ट्रीय देशों को निष्पक्ष तरीके से यह देखना चाहिए कि आतंकवाद, उग्रवाद और अन्य अवांछित गतिविधियों से किस देश को लाभ मिल रहा है। पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के द्विपक्षीय और बहुआयामी समझौतों के बावजूद अफगानिस्तान के बदलाव पर 2014 में ब्रुसेल्स सम्मेलन के बाद से ही पाकिस्तान ने अघोषित युद्ध शुरू कर दिया है।
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- फोटो : PTI
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान को आतंकवाद का आका करार देते हुए दुनिया से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। मोदी ने कहा कि आतंकवाद पर साधी गई चुप्पी इसके आकाओं को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में शांति की आवाज उठाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कठोर कार्रवाई जरूरी है।
यह कार्रवाई न सिर्फ आतंकी ताकतों के खिलाफ होनी चाहिए बल्कि इन्हें सहयोग, संरक्षण, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद देने वालों के खिलाफ भी होनी चाहिए। अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए आतंकवाद और सीमा पार प्रायोजित ताकतों से सबसे बड़ा खतरा है।’ सीमा पार आतंकवाद के सवाल पर सरताज को रविवार को करीब 40 देशों के सामने सार्वजनिक अपमान झेलना पड़ा।
अशरफ गनी ने आतंकवाद के सवाल पर पाकिस्तान पर ताबड़तोड़ हमले किए। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए 500 करोड़ डॉलर की मदद का वादा किया है। मिस्टर अजीज, मैं कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान इस रकम का अपने यहां आतंकवाद के खात्मे के लिए बेहतर इस्तेमाल कर सकता है।’
उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘तालिबान के एक शीर्ष नेता ने हाल ही में कहा कि संरक्षण न मिलने पर उसके संगठन का एक महीने से ज्यादा अस्तित्व नहीं रह सकता। पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए क्या कर रहा है? इस साल अफगानिस्तान में आतंकवाद ने सबसे ज्यादा जानें ली हैं।
डोभाल और अजीज साथ चले पर बात नहीं
फाइल फोटो
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यह हमें स्वीकार्य नहीं है। गनी ने इस दौरान सीमा पार आतंकवाद को चिह्नित करने और इससे निपटने के लिए एक फंड के निर्माण की वकालत की। आतंकी ढांचे और इसके संरक्षकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का वक्त आ गया है। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद से मुकरने की पाकिस्तान की आदत की भी निंदा की और आतंकी हमलों की सत्यता परखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक की टीम का गठन करना होगा।
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि ठोस सामूहिक इच्छाशक्ति से ही खूनखराबा और खौफ फैलाने वाले आतंकी नेटवर्क का नाश होगा। उन्होंने दुनिया को आतंकवाद के खतरे को समझने और इसके खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट प्रयास नहीं होने और चुप्पी साधने से इसके आकाओं को मजबूती मिलती है। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकी नेटवर्क के कारण दुनिया में रक्तपात का दौर चल रहा है। इस मामले में चुप्पी और निष्क्त्रिस्यता का प्रसार कम करने और इसके बदले मजबूत—सामूहिक इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है।
काम आई भारत की कूटनीति
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अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए आयोजित इस सम्मेलन में भारत ने कूटनीतिक चतुराई दिखाई। हार्ट ऑफ एशिया के इस बड़े मंच पर पाकिस्तान पर खुद हमला बोलने के बजाय भारत ने अफगानिस्तान से ही उसे खरी-खरी सुनवाने की रणनीति अपनाई।
मुख्य सम्मेलन के उद्घाटन के पहले इसी कड़ी में पीएम मोदी और राष्ट्रपति गनी के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन कराया गया। हालांकि सरताज इसी आशंका के मद्देनजर एक दिन पहले पहुंचे और गनी के साथ बैठक भी की। मगर इस मोर्चे पर वह अफगानिस्तान को मनाने में नाकाम रहे।
दोनों ने एक दूसरे को सराहा
इस दौरान भारत और अफगानिस्तान ने एक-दूसरे को जमकर सराहा और भविष्य में रिश्तों में और मजबूती लाने का संकल्प जताया। गनी ने भारत को अभिन्न मित्र बताते हुए उसकी ओर से अफगानिस्तान को मिली मदद पर धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि चाबहार समझौता भारत—ईरान—अफगानिस्तान को और करीब लाएगा। पीएम मोदी ने इस दौरान अफगानिस्तान को हरसंभव मदद जारी रखने और वहां शाति बहाली के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने की घोषणा की।
सरताज और मोदी के बीच न तो वार्ता की गुंजाइश थी और न ही हुई। मगर औपचारिक मुलाकात में पीएम मोदी ने सरताज से पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ का हालचाल पूछा। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस पर सरताज ने कहा कि वह स्वस्थ हैं और आपके लिए उन्होंने दुआ मांगी है। इस दौरान सरताज की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी अनौपचारिक बातचीत हुई।
मिलकर प्रयास करें तो पनाह को तरसेंगे आतंकी समूह: जेटली
आतंकी ताकतों को किसी तरह की पनाहस्थली नहीं मिल पाए, इसके लिए भारत ने सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में कहा कि इस दिशा में अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की खास जिम्मेदारी बनती है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीमार होने के कारण उनकी जगह सम्मेलन में प्रतिनिधित्व कर रहे जेटली ने कहा कि इसके लिए अच्छे और बुरे आतंकवादियों में भी भेद नहीं होना चाहिए और न ही एक समूह को दूसरे समूह के खिलाफ खड़ा करना चाहिए। तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अलकायदा, लश्करे ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे सभी आतंकी संगठनों के साथ एक जैसी कार्रवाई होनी चाहिए।