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नॉकआउट पंच लगा सकेंगे विजेंदर, चुनावी रिंग के दिग्गज रमेश विधूड़ी से मुकाबला

Sat, 11 May 2019 02:35 AM IST
गौरव द्विवेदी अनूप वाजपेयी, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विजेंदर सिंह (फाइल फोटो)
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ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने वाले प्रोफेशनल बॉक्सर विजेंदर सिंह दक्षिण दिल्ली की जिस चुनावी रिंग में उतरे हैं, उसमें उन्हें कोई अनुभव नहीं है। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ खड़े भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी इस रिंग के हैवीवेट खिलाड़ी हैं। पिछला चुनाव एक लाख से अधिक मतों से जीते थे। दक्षिण दिल्ली सीट हमेशा हाईप्रोफाइल रही है। एक समय केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यहां से सांसद रही हैं। 

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दिग्गज भाजपा नेता स्व. मदनलाल खुराना भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दस विधानसभाओं वाले संसदीय क्षेत्र का स्वरूप कुछ सालों में बदला है। यहां चमक-दमक वाली पॉश कॉलोनियां हैं तो सैकड़ों की संख्या में समस्याओं से घिरी अनधिकृत काॅलोनियां भी हैं। दिल्ली के पुराने स्वरूप और ग्रामीण परिवेश का प्रतिनिधित्व यहां के 54 गांव हैं, जिनका स्वरूप समय के साथ बदला है, लेकिन पुरानी बुनियादी दिक्कतें अभी भी जस की तस हैं।

रमेश बिधूड़ी इसी इलाके से आते हैं और अपनी गुर्जर बिरादरी के 22 गांवों में अच्छी पकड़ है। ग्रामीण पृष्ठभूमि उन्हें गांवों में मजबूत बना रही है। हालांकि अनधिकृत कॉलोनियों की समस्याएं और यूपी, बिहार और अन्य राज्यों के लोगों की कसौटी पर बिधूड़ी फिट नहीं बैठ रहे हैं। पूर्वांचलियों से भेदभाव के आरोप उन पर लगते रहे हैं। इन कॉलोनियों में बिधूड़ी का विरोध नया भी नहीं है। 2014 के चुनाव में इन कॉलोनियों का रुख आप की ओर था, जिसके चलते उसके उम्मीदवार कर्नल देवेंद्र कुमार सहरावत ने 3.90 लाख वोट लेकर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था।
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वहीं, कांग्रेस के बॉक्सर विजेंदर मूल रूप से हरियाणा के हैं। वे अपने पंच बॉक्सिंग में विरोधियों को परास्त करते रहे हैं, लेकिन नए खेल और रिंग के दांव, नियम और राजनीतिक पंच बिल्कुल अलग हैं। विजेंदर को उतारने की रणनीति उनका जाट समुदाय और युवा सेलिब्रिटी होना है। 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार रमेश कुमार भी जाट बिरादरी से थे। जाटों के 17 गांवों वाली इस संसदीय सीट में एक बार फिर जातीय गुणाभाग जाट-गुर्जर के आधार पर होना तय है।

आप ने भी युवा चेहरे राघव चड्ढा पर दांव लगाया है। पेशे से सीए और दिल्ली में पले-पढ़े होने के बावजूद राघव को इलाके के लोग बाहरी मानते हैं। आप को विश्वास है कि दसों विधानसभाओं पर उनके विधायक हैं इसलिए वे मजबूती से लड़ेंगे। लेकिन माना जा रहा है कि, सभी क्षेत्रों में लोग राघव को आप के कामकाज की कसौटी पर कसेंगे। हालांकि उन्हें अनधिकृत काॅलोनियों के साथ दक्षिण के पंजाबी मतदाता का समर्थन मिल सकता है।  

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