आलू में कैसे होती है मिलावट
दरअसल, सीमेंट और विशेष रंग की एक मिट्टी को मिलाकर पानी में डालकर एक बेहद पतला घोल बनाया जाता है। इसमें पुराने आलू को डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद उस आलू को निकालकर सुखा लिया जाता है। इस प्रकार आलू के ऊपर मिट्टी की एक हल्की पीली-भूरी परत चढ़ जाती है।
इससे आलू की ऊपरी परत नए आलू की तरह आसानी से निकलने लगती है। खुदरा बाजार में सब्जी विक्रेता इसे लोगों को नया पहाड़ी आलू बताकर ऊंची कीमत पर बेच देते हैं।
अन्य सब्जियों में भी होती है मिलावट
दरअसल, फल-सब्जियों को नया और ताजा दिखाने के लिए कुछ विक्रेता कई गलत तरीके इस्तेमाल करते हैं। इनके लिए मोम, ग्रीस या कोई अन्य तेल जैसी चीज से सने कपड़े से फल-सब्जियों को धीरे-धीरे रगड़ दिया जाता है।
कुछ सब्जियों को ज्यादा हरा दिखाने के लिए उन्हें हरे रंग के पानी के घोल में डालकर निकाल लिया जाता है। इससे फल-सब्जियों में विशेष चमक आ जाती है और ग्राहक उन्हें ज्यादा अच्छी सब्जी समझकर खरीद लेते हैं। लेकिन इस तरह की सब्जियों को खाने से कई तरह के गंभीर रोग हो सकते हैं।
हमें भी रहना होगा सावधान
मेट्रो अस्पताल के सीनियर डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा कि इन रसायनों से घुली सब्जियों को खाने से शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। इससे बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना होती है और उन्हें कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर है कि खाने-पीने की चीजों को सफल या किसी अन्य आधिकारिक चेन के माध्यम से खरीदें, जो अपनी वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता के मामले में क्वालिटी स्टैंडर्ड मेंटेन बनाने का काम करते हैं। इनके माध्यम से हुई किसी गड़बड़ी को आसानी से पकड़ा भी जा सकता है।
प्राकृतिक रूप से फलों-सब्जियों कि ऊपरी सतह पर एक विशेष चमक होती है, लेकिन अप्राकृतिक तरीके से ज्यादा चमकीले फलों-सब्जियों को खरीदने से हमें बचना चाहिए। इन्हें खाना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है।