अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (ईस्टर्न प्रोजेक्ट्स), जितेंद्र प्रसाद ने प्रोजेक्ट वार्तक के अंतर्गत हो रहे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधोसंरचना कार्यों का एक सप्ताह लंबा निरीक्षण किया है। इस दौरान उन्होंने इसे स्थानीय समृद्धि का रास्ता भी बताया।
सीमा क्षेत्रों में सड़क संपर्क न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि स्थानीय जनता के लिए स्वास्थ्य व शैक्षिक ढांचों तक पहुंच, व्यापार में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक है। इस क्षेत्र में जिस तरह का काम प्रोजेक्ट वार्तक की टीम, टास्क फोर्स और सभी आरसीसी ने की है, वाकई में वह सराहनीय है, जो कठिन जलवायु और दुर्गम भूभाग के बावजूद सीमा क्षेत्रों में सड़कों को जोड़ने और उन्हें दुरुस्त बनाए रखने में लगे हुए हैं।
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यह बात अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (ईस्टर्न प्रोजेक्ट्स), जितेंद्र प्रसाद, विशिष्ट सेवा मेडल ने शुक्रवार को प्रोजेक्ट वार्तक के अंतर्गत हो रहे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधोसंरचना कार्यों का एक सप्ताह लंबा निरीक्षण पूरा करने के बाद कही। उल्लेखनीय है कि प्रोजेक्ट वार्तक का मुख्यालय तेजपुर में स्थित है और वर्ष 1960 से यह कामेंग और तवांग जिलों में सड़क एवं पुल निर्माण कार्यों में सक्रिय है।
जितेंद्र प्रसाद, अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (ईस्टर्न प्रोजेक्ट्स)
- फोटो : अमर उजाला
पिंजौली पुल के बनने से होगा सामरिक फायदा
इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने कामेंग जिले में 14 टास्क फोर्स के अधीन ओरांग-कलाकतांग-रुपा-टेंगा (ओकेएसआरटी) रोड, बालिपाड़ा-चारद्वार-तवांग (बीसीटी) रोड, बीजेजी एक्सिस, सेला-छाब्रेला रोड और सेला टनल का दौरा किया। (ओकेएसआरटी) रियलाइन्मेंट प्रोजेक्ट से बालेमु-कलाकतांग के बीच की दूरी 17 किमी कम होगी और कई खतरनाक मोड़ों से छुटकारा मिलेगा, जिससे यातायात सुगम और निर्बाध होगा। उन्होंने दिरांग बाईपास और 135 मीटर लंबे पिंजौली पुल का भी निरीक्षण किया। दिरांग बाईपास से तवांग और अग्रिम इलाकों तक जाने वाले बीसीटी रोड पर लगने वाले दैनिक जाम से राहत मिलेगी, वहीं पिंजौली पुल सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और अपने अंतिम चरण में है।
जितेंद्र प्रसाद, अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (ईस्टर्न प्रोजेक्ट्स)
- फोटो : अमर उजाला
जितेंद्र प्रसाद ने देखी सड़कों की प्रगति
जितेंद्र प्रसाद ने तवांग जिले में भी कई परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने लुमला होते हुए जिमीथांग तक यात्रा की और सीमा क्षेत्रों में चल रहे नेल्या-हाटोंगा, नेल्या-रिंग कॉन्टूर और नेल्या-धौला सड़क परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 117 आरसीसी , सुंगत्सेर का दौरा कर सुंगत्सेर-सुलुला और चीमा-कारपोला सड़कों की प्रगति देखी। उन्होंने तवांग-पीटीएसओ लेक-बुमला-असम हिल-एलजीजी रोड तथा 763 टास्क फोर्स के अधीन 52 किमी लंबे एलजीजी -दमटेंग-यांग्त्से मार्ग का भी निरीक्षण किया।
जितेंद्र प्रसाद, अतिरिक्त महानिदेशक सीमा सड़क (ईस्टर्न प्रोजेक्ट्स)
- फोटो : अमर उजाला
सड़कों से होकर आती है विकास
निरीक्षण के दौरान एडीजीबीआर (ईस्ट) ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में सड़क संपर्क न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि स्थानीय जनता के लिए स्वास्थ्य व शैक्षिक ढांचों तक पहुंच, व्यापार में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक है। उन्होंने प्रोजेक्ट वार्तक की टीम, टास्क फोर्स और सभी आरसीसी के प्रयासों की सराहना की, जो कठिन जलवायु और दुर्गम भूभाग के बावजूद सीमा क्षेत्रों में सड़कों को जोड़ने और उन्हें दुरुस्त बनाए रखने में लगे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को तकनीकी और योजनागत पहलुओं पर मूल्यवान मार्गदर्शन दिया और समय पर सड़क निर्माण कार्य पूरे करने पर बल दिया।