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अनिल धीरूभाई अंबानी समूह मामला: 73000 करोड़ घोटाले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI-ED को दिये ये आदेश

Mon, 23 Mar 2026 05:33 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह से जुड़े कथित बैंकिंग घोटाले में सीबीआई और ईडी की जांच पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एजेंसियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच का आदेश दिया है। करीब 73,000 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले में अब तक 15,000 करोड़ की संपत्ति जब्त हुई है। आइए जानते हैं मामले में कोर्ट ने और क्या कुछ कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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बड़े बैंकिंग घोटाले के आरोपों में फंसे अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की जांच में दिखाई गई अनिच्छा पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि इतने बड़े मामले में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जांच एजेंसियों का रवैया भरोसा पैदा करने वाला होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें ईडी के वरिष्ठ अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। अब तक करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी वित्तीय संस्थानों को ईडी को पूरा सहयोग देने का निर्देश भी दिया।

क्या है पूरा मामला और कितनी बड़ी है रकम?
यह मामला एडीएजी कंपनियों द्वारा कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। कोर्ट में बताया गया कि कुल कथित घोटाला करीब 73,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं एक मामले में 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ रुपये देकर निपटाने की बात सामने आई है। इससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
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जांच एजेंसियों पर क्यों उठे सवाल?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि SEBI रिपोर्ट में साफ संकेत हैं कि पैसे को व्यवस्थित तरीके से इधर-उधर किया गया, लेकिन CBI ने अब तक कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं की। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह यह निर्देश नहीं दे सकता कि किसे गिरफ्तार किया जाए, लेकिन जांच में सुस्ती स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि जांच का परिणाम ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों का भरोसा बने।

अब तक जांच में क्या कार्रवाई हुई है?
ईडी और सीबीआई फिलहाल कई FIR की जांच कर रहे हैं। ईडी ने बताया कि रिलायंस होम फाइनेंस में 7,500 करोड़ रुपये और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में 8,200 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के मामले सामने आए हैं। वहीं रिलायंस पावर के मामले में फर्जी बैंक गारंटी देने से 105 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात भी जांच में सामने आई है। जांच एजेंसियों ने अब तक कई अहम दस्तावेज और जानकारी जुटाई है।

अनिल अंबानी की तरफ से क्या दलील दी गई?
अनिल अंबानी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले के चलते बैंक उनसे बातचीत करने से हिचक रहे हैं, जिससे कर्ज निपटाने में दिक्कत आ रही है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि उसने किसी भी तरह की बातचीत पर रोक नहीं लगाई है। साथ ही अंबानी ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे।
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आगे क्या होगा और कोर्ट का रुख क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से चार हफ्ते में नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए और इसे तार्किक अंत तक पहुंचाया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी सरकारी संस्था से सहयोग नहीं मिलता है, तो एजेंसियां सीधे कोर्ट का रुख कर सकती हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।


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