अभिनेता व पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का सवाल है कि आखिर ऐसी क्या बात हो गई कि एक-एक करके सभी पड़ोसी देशों से हमारे रिश्ते खराब होते जा रहे हैं। पाकिस्तान और चीन से हमारे रिश्ते कुछ तनावपूर्ण हमेशा ही रहे हैं, लेकिन अब कुछ अन्य देशों से भी हमारे रिश्तों में दरार आ रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस मुद्दे पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और विदेश नीति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सीनियर फिल्म एक्टर ने यह बात ऐसे समय में कही है जब भारत और चीन के बीच संबंध ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
शनिवार को अमर उजाला से बातचीत करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि किसी मुद्दे पर विरोध अलग बात है, लेकिन किसी को प्रधानमंत्री की नियत पर शक नहीं होना चाहिए। यह ऐसा समय है जब पूरे देश को हमारी सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देना चाहिए। अगर किसी मुद्दे पर किसी के भिन्न विचार हैं तो उस पर सही समय पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन इस समय पूरी दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक हैं और इसके लिए सबको एक साथ आना चाहिए।
उन्होंने मीडिया के एक वर्ग की भाषा पर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बेहद सधी और शांतपूर्ण बातचीत होनी चाहिए, लेकिन कुछ लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जिनसे संबंध बनने की बजाय बिगड़ने की आशंका ज्यादा होती है।
भाजपा आज भी पहला घर
शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा के साथ अपने संबंधों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि किसी मामले में भाजपा आज भी उनका पहला घर है। यहीं से उन्होंने राजनीति की पारी की शुरुआत की। नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से उन्होंने यही सीखा था कि स्वयं से बड़ी पार्टी होती है और पार्टी से बड़ा देश। बुजुर्ग नेताओं से मिली इसी सीख के कारण उन्होंने नोटबंदी जैसे कुछ फैसलों पर सरकार का विरोध किया। देश के युवाओं, किसानों और गरीबों के हक में उठाई गई उनकी यही बात कुछ लोगों को अच्छी नहीं लगी जिसके बाद कुछ इस तरह की परिस्थितियां बनीं कि उन्हें भाजपा से अलग राह चुननी पड़ी।
परिवारवाद नहीं, ग्रुपवाद अवश्य
सुशांत सिंह की आत्महत्या पर उन्होंने कहा कि इस फिल्म इंडस्ट्री में सबका केवल एक पैमाना होता है कि उस व्यक्ति की फिल्में सफल होती हैं या नहीं। अगर फिल्में सफल हैं तो वह किसी भी माध्यम से आया हुआ व्यक्ति हो, उसे स्वीकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें कभी परिवारवाद का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन उनके समय में भी ग्रुप होते थे जो आज भी हैं।