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CJI के खिलाफ टिप्पणी मामला: कार्यकर्ता ने अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र, अवमानना की कार्यवाही के लिए मांगी अनुमति

Tue, 07 Oct 2025 08:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

मिशन अंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर सीजेआई बीआर गवई पर हमले के लिए कथित रूप से उकसाने वाले दो व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी है। पत्र में कहा गया है कि यदि ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की नींव को खतरा हो सकता है।
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जस्टिस बीआर गवई, भारत के मुख्य न्यायाधीश - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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मिशन अंबेडकर के संस्थापक ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि को पत्र लिखा है और भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवाई पर हमले के लिए कथित रूप से उकसाने वाले दो लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति मांगी है। 
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पत्र में सूरज कुमार बौद्ध ने धार्मिक प्रवचन करने वाले अनिरुद्धाचार्य उर्फ अनिरुद्ध राम तिवारी के 21 सितंबर को जारी एक वीडियो का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने विष्णु मूर्ति मामले में सीजेआई की टिप्पणी को लेकर कथित तौर पर धमकी दी है। वीडियो में तिवारी यह कहते हुए सुने गए, अगर तुम्हें अपनी छाती फड़वानी तो मुझे बताओ। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

अनिरुद्धाचार्य का पूरा बयान
'जज साहब से एक सवाल करना है। कहीं मिलें तो पूछना कि सब काम भगवान ही करेंगे तो तुम क्यों कुर्सी तोड़ रहे हो? तुम्हें जज बनाया गया है इसलिए कि तुम न्याय करो। न्याय करना चाहिए। अब आप हिंदू सनातन संस्कृति का अपमान करते हुए क्या बोलते हैं कि तुम्हारे भगवान में शक्ति है तो खुद बना लें मंदिर। वो तो प्रकट होकर रावण को भी मार सकते हैं। हिरणकश्यप की छाती भी फाड़ सकते हैं। अब तुम्हें अपनी छाती फड़वानी है तो बताओ, क्योंकि तुम जैसे अधर्मियों को मारने के लिए भगवान आते हैं।' 
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इस पत्र में यह भी कहा गया है कि यूट्यूबर अजीत भारती ने भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बयान दिए हैं। इन बयानों और कृत्यों का मकसद भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ हिंसा को भड़काना है। इस तरह की सार्वजनिक उकसावे की भाषा और लहजा बेहद खतरनाक हैं और ये पोस्ट वायरल होकर गंभीर बहस और तनाव को बढ़ावा रहे हैं।
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पत्र में कहा गया है, भारत के सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में इस तरह का व्यवहार पहले कभी नहीं देखा गया। अगर ऐसे लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया, तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और हमारे लोकतंत्र की नींव खतरे में पड़ सकती है। कोई भी अदालत या न्यायाधीश अपने कर्तव्यों को भय या पक्षपात के बिना निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए। सोमवार को एक वकील (71 वर्षीय) ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई पर जूता उछालने की कोशिश की। इस घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उस वकील का लाइसेंस निलंबित कर दिया।  




 
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