फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharashtra: आरोपी ने जज के जाली हस्ताक्षर किए, बॉम्बे हाईकोर्ट से जालसाजी मामले में ली अग्रिम जमानत

Thu, 27 Mar 2025 03:32 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

जालसाजी और कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में पुणे के आरोपी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के जाली हस्ताक्षर कर बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली। शिकायतकर्ता ने इस फर्जी आदेश की पहचान की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने उसे दी गई जमानत रद्द कर दी। आरोपी के खिलाफ अब नई एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि आरोपी फिलहाल फरार चल रहा है। 
विज्ञापन
अपराध (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जालसाजी और कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में आरोपी ने साजिश रचने में कोर्ट को भी नहीं बख्शा। उसने अग्रिम जमानत पाने के लिए पहले पुणे कोर्ट के जज के जाली हस्ताक्षर किए, फिर फर्जी आदेश का इस्तेमाल कर बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली। पुलिस ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी हरिभाऊ चेमटे को जनवरी में जमानत मिली थी और अब वह फरार है। अब उसके खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित कई धाराओं में नई एफआईआर दर्ज की गई है। 

विज्ञापन


पुलिस के अनुसार, पुणे स्थित फर्म सीटीआर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने 2022 में विमानताल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जब उसे पता चला कि उसके पेटेंट किए गए चित्र और डिजाइन का चेन्नई की एक कंपनी द्वारा दुरुपयोग किया गया है।

ये भी पढ़ें: Admission Fraud: एमबीए प्रवेश प्रक्रिया में धोखाधड़ी, दिल्ली से चार आरोपी गिरफ्तार; दो बीटेक छात्र भी शामिल
विज्ञापन


जांच में पता चला- डिजाइनों की चोरी में शामिल था चेमटे
जांच में पता चला कि सीटीआर के कुछ कर्मचारी, आरोपी कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर, इन मालिकाना डिजाइनों का अनधिकृत उपयोग कर रहे थे। चेमटे, जो 2016 और 2017 के बीच सीटीआर के गुणवत्ता नियंत्रण विभाग में काम कर रहा था, कथित तौर पर इस चोरी में शामिल था। इसके बाद, उसे मामले के कई आरोपियों में शामिल किया गया। 

हाईकोर्ट में लंबित थी चेमटे की अग्रिम जमानत
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चेमटे की अग्रिम जमानत याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित थी, जिसके लिए उसने साजिश रची। आरोपी के खिलाफ दर्ज नई एफआईआर के हवाले से अधिकारी ने बताया कि उसने इस साल जनवरी में सीआरपीसी की धारा 169 के तहत एक फर्जी अदालती आदेश जारी किया, जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के जाली हस्ताक्षर थे। आरोपी ने जमानत हासिल करने के लिए इस आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में जमा किया। पुलिस के अनुसार, हाईकोर्ट ने उसे 17 जनवरी, 2025 को अग्रिम जमानत दे दी।

  • बता दें कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 169 के तहत किसी आरोपी को रिहा किया जा सकता है, अगर आगे की कानूनी कार्यवाही को उचित ठहराने के लिए उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
ये भी पढ़ें: UP: इंडियन बैंक जसराना में ग्राहकों से 60 लाख की धोखाधड़ी, शाखा प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ जांच

विज्ञापन

शिकायतकर्ता ने संदिग्ध आदेश की पहचान की
अधिकारी ने बताया कि जमानत मिलने के बाद, मूल जालसाजी मामले में शिकायतकर्ता ने संदिग्ध आदेश की पहचान की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने चेमटे को दी गई जमानत रद्द कर दी और धोखाधड़ी की जांच शुरू कर दी। बाद में, शिकायतकर्ता विमानताल पुलिस थाने पहुंचा और चेमटे के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज कराई। 

संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें