पीएलओएस कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार टिड्डी के प्रकोप का अब कई दिन पहले अनुमान लगाया जा सकता है। यदि बड़ा आक्रमण होने की आशंका है तो इससे पहले कि फसल को भारी नुकसान हो, संबंधित लोगों को सतर्क किया जा सकता है।
रेगिस्तानी टिड्डी दल के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने यह अनुमान लगाने का तरीका विकसित किया है कि ये कब और कहां झुंड में आएंगे ताकि समय रहते उनसे निपटा जा सके। ये कीट इतने विनाशकारी होते हैं कि एक झुंड एक वर्ग किमी को कवर करते हुए एक दिन में 35,000 लोगों को खिलाने लायक भोजन चट कर सकते हैं।
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एक नजर अध्य्यन पर
पीएलओएस कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार टिड्डी के प्रकोप का अब कई दिन पहले अनुमान लगाया जा सकता है। यदि बड़ा आक्रमण होने की आशंका है तो इससे पहले कि फसल को भारी नुकसान हो, संबंधित लोगों को सतर्क किया जा सकता है।
क्या कहते है आकड़े
नई चेतावनी प्रणाली मौसम के पूर्वानुमान से संबंधित आकड़ों और हवा में कीटों की गतिविधियों के अत्याधुनिक कम्प्यूटेशनल मॉडल का उपयोग करके तैयार की गई है, ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि झुंड नए भोजन और प्रजनन के मैदानों की तलाश में कहां जाएंगे। यह पता चलते ही प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में कीटनाशकों का छिड़काव किया जा सकता है।