महिलाओं के रात के वक्त काम करने की पाबंदी इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के वक्त लगाई गई थी। ऐसा करने के पीछे उनका विचार था कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक कमजोर हैं। साथ ही वह कार्य के दौरान शोषण के लिए भी पुरुषों के मुकाबले कमजोर हैं। महिलाओं की क्षमता को कम आंकते हुए पुरुषों को ही उनसे बेहतर विकल्प माना जाता रहा है।
साल 1948 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संस्थान (आईएलओ) ने महिलाओं को खदानों और उद्योग से संबंधित कार्य स्थलों में रात के वक्त काम करने से दूर रहने के लिए कहा था। स्पेन ने भी साल 1995 तक महिलाओं के खदान, बिजली और निर्माण कार्य से संबंधित काम करने पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए थे। पूर्व उपनिवेशों में महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध आज के समय में भी लगाए जा रहे हैं जिनके पीछे का कारण साल 1960 की स्पेनिश नागरिक संहिता है।
कई कानूनों को तो हाल ही में लागू किया गया है। जैसे वियतनाम में महिलाओं का 50 हॉर्सपावर या उससे अधिक में ट्रैक्टर चलाने पर प्रतिबंध। इस कानून को साल 2013 में ही लागू किया गया था। लेकिन कई देश ऐसे भी हैं जहां उदारीकरण की नीति अपनाई जा रही है। हाल ही में बुलगारिया, किरिबाती और पोलैंड ने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटा दिया है।
वहीं कोलंबिया और कांगो ऐसे देश हैं जिन्होंने सारे तो नहीं पर कुछ प्रतिबंधों को हटा दिया है। कई देशों ने तो तकनीकी विकास के चलते कानूनों में परिवर्तन किया है। क्योंकि तकनीकी विकास से कई तरह के काम सुरक्षित हो गए हैं, जिस कारण महिलाओं की खुद की सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भरता कम हो गई है। तो कहीं अदालतों ने कानूनों को भेदभावपूर्ण बताते हुए उनमें बदलाव किया है।
श्रमिकों की कमी भी महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटाने में मददगार साबित हुई है। जब बहुत से पुरुषों ने केलंबिया के मरमाटो को छोड़ दिया और बेहतर रेजगार की तलाश में दूसरी जगहों पर जाने लगे तो न चाहते हुए भी महिलाओं को उनकी जगह काम पर रखना पड़ा। महिलाओं को पुरुषों की जगह रखने से कानून भी टूट रहा था पर काम चलाने के लिए मालिकों के पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
ठीक इसी तरह पूर्वी यूरोप के पुरुष ट्रकर्स जो यूरोपीय संघ से जुड़े थे, उन्होंने भी पश्चिमी देशों की तरफ जाना शुरू कर दिया। जिसके बाद न चाहते हुए भी महिलाओं को उनकी जगह काम पर रखा गया। साल 2011 में फिलिपींस में कॉल सेंटरों में काम करने के लिए महिलाओं के रात के वक्त काम करने पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया गया।
बता दें आईएलओ द्वारा महिलाओं पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को विश्व बैंक के इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। इसमें वो जगह शामिल हैं जहां केमिकल का काम किया जाता है। वहां गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ताकि उनके होने वाले बच्चे की सेहत पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।