आनुवंशिक विविधता में कमी का मतलब है किसी भी प्रजाति के जीन पूल में मौजूद भिन्नताओं का घट जाना। यह विविधता जीवों के लिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह उन्हें बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और विपरीत हालातों का सामना करने में सक्षम बनाती है। यह जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आई है।
दुनियाभर में लगभग दो-तिहाई पौधों और जानवरों की प्रजातियां तेजी से अपनी आनुवंशिक विविधता खो रही हैं। इससे भविष्य में बदलते पर्यावरणीय हालात के अनुकूल ढल पाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
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आनुवंशिक विविधता में कमी का मतलब है किसी भी प्रजाति के जीन पूल में मौजूद भिन्नताओं का घट जाना। यह विविधता जीवों के लिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह उन्हें बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और विपरीत हालातों का सामना करने में सक्षम बनाती है। यह जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आई है। यह महत्वपूर्ण अध्ययन सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया है और इसके नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल नेचर में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने 1985 से 2019 के बीच 628 प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता का विश्लेषण किया। इनमें जानवर, पौधे और फंगस भी शामिल हैं। इस अध्ययन में चीन, ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस, स्वीडन और पोलैंड के वैज्ञानिकों ने भी योगदान दिया है। निष्कर्ष बताते हैं कि आनुवंशिक विविधता में सबसे तेज गिरावट पक्षियों और स्तनधारी प्रजातियों में देखी गई है। इसका मुख्य कारण भूमि के उपयोग में परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ और जंगल की आग, साथ ही बीमारियों का बढ़ता प्रभाव है। नदियों के प्रवाह में बदलाव भी इसका एक अहम कारण है।
मानव गतिविधियां भी जिम्मेदार
शोधकर्ताओं का कहना है कि आनुवंशिक विविधता में गिरावट के लिए मानवजनित गतिविधियां भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई, अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां इस गिरावट को और तेज कर रही हैं। किसी प्रजाति के विलुप्त होने से पहले उसकी आबादी में कमी आना शुरू हो जाती है और वह धीरे-धीरे अलग-थलग पड़ जाती है।
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संरक्षण के प्रयास दे रहे हैं सकारात्मक परिणाम
संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास प्रजातियों की सुरक्षा में प्रभावी साबित हो रहे हैं। जैसे प्राकृतिक आवासों का पुनर्वास, प्रजातियों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित करना और आबादी बढ़ाने के लिए प्रजनन कार्यक्रम चलाना आदि। आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के लिए कीट और आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण जैसे उपाय कारगर हो सकते हैं।