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10 साल में वैश्विक स्तर पर बढ़ी एंटीबायोटिक्स की खपत, प्रभावहीन होता जा रहा असर

Sun, 29 Jul 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनियाभर में नई-नई बीमारियां जिस तरह से अपने पांव पसार रही हैं, उसको देखते हुए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। एक शोध के मुताबिक, साल 2000 से 2010 के बीच एंटीबायोटिक्स की खपत वैश्विक रूप से बढ़ी है। इसकी सबसे ज्यादा आपूर्ति भारत, चीन, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका में है, लेकिन ऐंटीबायोटिक दवाओं की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक स्तर पर इसका असर प्रभावहीन होता जा रहा है। 

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ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने इसको लेकर एक शोध किया है। इसमें 24 देशों के शोध का विश्लेषण किया गया है। इस शोध का प्रकाशन 'द जर्नल ऑफ इंफेक्शन' में किया गया है। इस शोध में ये सामने आया है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल एंटीबायोटिक के प्रतिरोध के फैलाव व विकास को सुविधाजनक बना सकता है। 

बता दें कि ऐंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़कर 50 अरब से 70 अरब मानक इकाई हो गया है। इसके कारण ऐंटीबायोटिक्स का असर प्रभावहीन होता जा रहा है, जिससे करीब 7 लाख लोग हर साल अपनी जान गंवा देते हैं। दरअसल, एंटीबायोटिक का असर कम हो जाने पर बैक्टीरिया शरीर में हावी हो जाते हैं, जिससे लोगों की मौत हो जाती है। 
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अमेरिका में हर साल करीब 20 लाख लोग संक्रमण के शिकार हो जाते हैं, जिसमें 23,000 लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण के कारण यूरोप में भी हर साल 25 हजार लोगों की मौत हो जाती है। 

भारत का हाल भी कुछ ऐसा ही है। इसके प्रतिरोधी संक्रमण के कारण देश में 50 हजार से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। 57 हजार के करीब नवजात सेप्सिस की मौतें भी हर साल एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण के कारण होती हैं।

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