अफगानिस्तान से जब अमेरिकी सेना वापस लौट रही थी, तभी पाकिस्तान के आर्मी चीफ बाजवा ने कह दिया कि हमने बुरे वक्त में तालिबान की मदद की है। पाकिस्तान, लड़ाकों की भर्ती से लेकर उन्हें हथियार एवं आर्थिक मदद देता आया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने एक बार कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकियों के साथ अपने संबंध समाप्त नहीं किए हैं। दस हजार से अधिक लड़ाके अफगानिस्तान में प्रवेश कर चुके हैं। तालिबान का कब्जा होने के बाद पाकिस्तान ने कई बड़े आतंकियों को भी रिहा कर दिया है। मुल्ला बरादर सहित तालिबान के कई बड़े नेता पाकिस्तानी जेलों में रहे हैं।
जनरल जीडी बख्शी कहते हैं, पाकिस्तानी ले. जनरल सईद शमसार और आदिल रहमानी, पंजशीर में रह कर लड़ाई का संचालन कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान अपनी मर्जी से दूसरे देशों के साथ संबंध स्थापित न करे। चीन ने कहा, तालिबान अफगानिस्तान में 'सबको साथ लेकर' सरकार बनाए, इस बयान ने पाकिस्तान को चिंता में डाल दिया। रूस और ईरान के बयान भी पाकिस्तान को मुसीबत में डाल देते हैं।
हालांकि इन सबके बीच, तालिबानी प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद ने 'पाकिस्तान को तालिबान का दूसरा घर' बताकर उसे कुछ सुकून देने का प्रयास किया है। मुजाहिद ने कहा, वे अपने घर के खिलाफ कुछ नहीं होने देंगे। दूसरी ओर, अल-कायदा ने 'इस्लामिक उम्माह को अफगानिस्तान में अल्लाह की दी गई आजादी मुबारक' नाम का संदेश जारी कर दिया। इस संगठन ने लिखा, ओ अल्लाह! लेवेंट, सोमालिया, यमन, कश्मीर और दुनिया की दूसरी इस्लामी जमीनों को इस्लाम के दुश्मनों से आजाद कराओ। दुनियाभर में मुस्लिम कैदियों को आजादी दिलाओ। अल-कायदा के इस संदेश को कश्मीर से जोड़कर पड़ोसी मुल्क खुश हो रहा है।