सार
ओडिशा में आठ साल बाद हुए छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी ने 346 कॉलेजों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और सहायक महासचिव पदों पर बड़ी संख्या में जीत दर्ज की। अमित शाह ने इसे 'नेशन फर्स्ट' विचारधारा के समर्थन का संकेत बताया, जबकि नितिन नवीन ने इसे राष्ट्रवाद से जोड़ा। राज्य में 56 प्रतिशत मतदान हुआ। क्या ये नतीजे युवाओं की राजनीतिक पसंद का स्पष्ट संकेत देते हैं? आइए, नतीजों से लेकर नेताओं के बयान तक सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
ओडिशा में आठ साल बाद हुए छात्र संघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कई प्रमुख पदों पर बड़ी संख्या में जीत दर्ज की है। संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 346 कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर 208, उपाध्यक्ष पद पर 214, महासचिव पद पर 221 और सहायक महासचिव पद पर 199 एबीवीपी उम्मीदवार जीते हैं। इन नतीजों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की युवा शक्ति ‘नेशन फर्स्ट’ यानी राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ी है।
अमित शाह ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एबीवीपी के ओडिशा के कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि पहले पंजाब यूनिवर्सिटी, फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी और अब ओडिशा की 13 यूनिवर्सिटी में एबीवीपी की जीत एक स्पष्ट संदेश देती है। शाह के मुताबिक, युवा झूठ, भ्रम और अव्यवस्था फैलाने वाली ताकतों के बजाय राष्ट्र को प्राथमिकता देने वाली विचारधारा के साथ हैं। उन्होंने छात्र संघ चुनावों के नतीजों को राष्ट्रवाद के प्रति युवाओं के समर्थन के रूप में पेश किया।
एबीवीपी ने कॉलेजों में किन पदों पर कितनी जीत दर्ज की?
एबीवीपी ने एक्स पर पोस्ट कर ओडिशा के 346 कॉलेजों में चार प्रमुख छात्र संघ पदों पर अपने उम्मीदवारों की जीत के आंकड़े साझा किए। संगठन के मुताबिक, इन पदों पर उसकी स्थिति इस प्रकार रही। इन आंकड़ों के अनुसार, महासचिव पद पर एबीवीपी के सबसे अधिक 221 उम्मीदवार जीते, जबकि सहायक महासचिव पद पर 199 उम्मीदवार विजयी हुए। ये आंकड़े संगठन की ओर से जारी किए गए हैं।
- अध्यक्ष: 208 उम्मीदवार विजयी।
- उपाध्यक्ष: 214 उम्मीदवार विजयी।
- महासचिव: 221 उम्मीदवार विजयी।
- सहायक महासचिव: 199 उम्मीदवार विजयी।
अमित शाह ने जीत को युवाओं की विचारधारा से कैसे जोड़ा?
अमित शाह ने एबीवीपी की जीत को राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के समर्थन का संकेत बताया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में संगठन की सफलता का भी जिक्र किया। शाह ने कहा कि ओडिशा की 13 यूनिवर्सिटी में जीत से पता चलता है कि युवा राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, युवाओं की सोच को लेकर यह शाह का राजनीतिक आकलन है। उनके बयान में छात्र चुनावों के नतीजों को राष्ट्रवाद के पक्ष में एक संदेश के तौर पर पेश किया गया।
नितिन नवीन ने चुनावी नतीजों पर क्या कहा?
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को ओडिशा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव जीतने वाले एबीवीपी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय हितों में युवाओं के विश्वास को दिखाती है। नवीन ने एबीवीपी के प्रदर्शन को युवाओं के नाम पर अराजकता फैलाने वाली राजनीति को खारिज किए जाने का संकेत भी बताया। उन्होंने अपने बयान में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवा राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आठ साल बाद हुए छात्र संघ चुनावों में कितने लोगों ने मतदान किया?
ओडिशा में 15 अक्तूबर को आठ साल के अंतराल के बाद छात्र संघ चुनाव कराए गए। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 337 उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनाव हुए और कुल मतदान 56 प्रतिशत रहा। चुनावों में कुल 3,610 उम्मीदवार विजयी हुए, जिनमें 3,453 कॉलेजों से और 157 विश्वविद्यालयों से थे। एबीवीपी की ओर से जारी 346 कॉलेजों के आंकड़े चार प्रमुख पदों पर उसके विजयी उम्मीदवारों की संख्या बताते हैं। वहीं, राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के चुनावी आंकड़े अलग से कुल विजयी उम्मीदवारों की संख्या देते हैं। इस तरह चुनाव के नतीजों के साथ एबीवीपी के प्रदर्शन और राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं।