होटल मैनेजर, अस्पताल कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी भी कर रहे हैं पास का इस्तेमाल
- फोटो : Getty Images
कमजोर वर्ग को 25 रुपयो में पास देने की रेलवे की इज्जत स्कीम का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। फर्जी तरीके से पास बनाकर बेधड़क लोग यात्रा कर रहे है। सांसदों द्वारा जारी आय प्रमाणपत्र के जरिए भी यह पास बनाए जा रहे हैं। सांसदों के हस्ताक्षर का नकल कर आय प्रमाणपत्र बनाकर भी इसका फायदा उठाया जा रहा है।
इस पास का इस्तेमाल होटल मैनेजर, अस्पताल के कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी समेत संगठित क्षेत्र के निजी व सरकारी कर्मचारी भी कर रहे है। रेलवे की स्थायी समिति की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। स्थायी समिति ने इसकी कीमत की समीक्षा करने के लिए रेल मंत्रालय को कहा है।
फर्जी तरीके से पास बनाने की वजह से रेलवे को भी चूना लग रहा है। इसके कारण यात्री यातायात में भी कमी दर्ज की जा रही है। दक्षिण-पश्चिम व पूर्व रेलवे में फर्जी तरीके से इज्जत मासिक पास बनाने वालों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है। मध्य रेलवे के तो आसनगांव में राज्य परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी इस पास से यात्रा करते हुए पाए गए हैं।
रेलवे की स्थायी समिति ने रेल मंत्रालय को कड़े शब्दों में इस दुरुपयोग को रोकने को कहा है। इसके साथ ही इस पास की कीमत की समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है। समिति ने कहा है कि इज्जत स्कीम की कीमत सात वर्ष पूर्व निर्धारित की गई थी, लिहाजा रेलवे मंत्रालय इसकी समीक्षा करने पर विचार करे। समिति ने यह भी कहा है कि मंत्रालय सुनिश्चित करे कि वास्तविक उपयोगकर्ताओं को इज्जत मासिक टिकट मिलने में परेशानी ना हो।
बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग को 25 रुपये में एमएसटी पास देने की योजना को पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी ने शुरू की थी। इस पास से यात्री डेढ़ सौ किलोमीटर प्रतिदिन रेल यात्रा कर सकते है। एक महीने का पास 25 रुपया में बनता है।
Published By Rahul Sankrityayan