महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गैंगस्टर अबू सलेम को पैरोल पर जवाब दिया। सरकार ने कहा कि सलेम 'अंतरराष्ट्रीय अपराधी' है, ऐसे में उसे केवल दो दिन की आपातकालीन पैरोल ही दी जा सकती है। बता दें कि सलेम को साल 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी पाया गया है। गैंगस्टर अबू सलेम को केवल दो दिन की आपातकालीन पैरोल देने की दलील के साथ सरकार ने यह भी कहा कि जेल से बाहर आने के बावजूद पुलिस का पहरा जरूरी है।
भाई के इंतकाल के आधार पर मांगी पैरोल
गौरतलब है कि अबू सलेम ने अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी की मृत्यु का हवाला देते हुए 14 दिन की पैरोल मांगी थी। हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील मंखुवार देशमुख ने कहा, 14 दिन की पैरोल संभव नहीं है। जेल प्रशासन ने केवल दो दिन की पैरोल की अनुमति दी है और पुलिस एस्कॉर्ट का खर्च भी सलेम को ही उठाना होगा।
सलेम के वकील ने पुलिस के पहरे पर आपत्ति जताई
सरकार के इस जवाब पर सलेम की वकील फरहाना शाह ने आपत्ति जताई और कहा कि दो दिन पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि सलेम को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के पहरे की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सलेम पिछले दो दशकों से जेल में है और वह एक भारतीय नागरिक भी है।
अदालत ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा, सुनवाई अगले सप्ताह
सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति अजय गडकरी और श्याम चंदक की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह 14 दिन की पैरोल देने से जुड़ी अपनी आपत्तियों को स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करे। अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
ये भी पढ़ें- गिनती भूल गया गैंगस्टर अबू सलेम?: सजा पूरा होने का किया दावा, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- 2005 से 25 साल कैसे गिना
पैरोल की दलील में सलेम ने और क्या बातें कहीं?
बता दें कि सलेम ने दिसंबर 2025 में याचिका दायर की थी। उसने अदालत को बताया कि उसने 15 नवंबर को ही आपातकालीन पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन जेल प्रशासन ने 20 नवंबर 2025 को उसकी अपील खारिज कर दी। उसने इस बात को भी रेखांकित किया है कि जेल की सजा होने के बाद से अब तक उसे केवल अपनी मां और सौतेली मां की मृत्यु के समय ही कुछ दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है, ऐसे में उसे छोड़ा जाना चाहिए।