एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर समाजवादी पार्टी नेता अबू आजमी ने अजीब प्रतिक्रिया दी है। आजमी ने कहा कि तेजस्वी के सामने ओवैसी की ताकत 10 किलो दूध में नींबू की एक बूंद जैसी है। ऐसे में माना जा रहा है कि आजमी यह कहना चाहते हैं कि तेजस्वी यादव का कद और जनाधार बहुत बड़ा है, जबकि ओवैसी का प्रभाव बहुत सीमित है। यानी सिर्फ एक विशेष समुदाय तक ही वो सीमित हैं। दरअसल, नींबू की एक बूंद दूध तो फाड़ देती है, लेकिन जब दूध की मात्रा 10 किलो होती है तो नींबू की बूंद भी कुछ नहीं कर पाती है। यानी वो साफतौर पर यही कहना चाह रहे हैं कि ओवैसी शोर मचाते हैं लेकिन उनका वास्तविक जनाधार काफी छोटा है।
हालांकि, अबू आजमी यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, "अगर ओवैसी तेजस्वी यादव को धूल चटा देंगे, तो वे किसे फूलों की माला पहनाएंगे?" यानी उनका कहना है कि अगर ओवैसी के कारण तेजस्वी हार भी जाते हैं, तो ओवैसी माला किसे पहनाएंगे।आजमी के बयान को विपक्षी राजनीति में रणनीतिक संदेश देने की कोशिश भी मानी जा सकती है। इससे सपा का रुख भी साफ हो गया है कि वे तेजस्वी यादव को ही विपक्ष का बड़ा चेहरा मानते हैं। फिलहाल तक इस बयान पर ओवैसी की पार्टी की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सियासत में ओवैसी बनाम तेजस्वी की जंग
बिहार की राजनीति में सीमांचल की सरगर्मी लगातार बढ़ रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव के बीच अब खुली बयानबाजी शुरू हो गई है। किशनगंज में 'सीमांचल न्याय यात्रा' के दौरान ओवैसी ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला और गठबंधन की असफल कोशिशों का जिक्र करते हुए राजद पर मुसलमानों की उपेक्षा का आरोप लगाया।
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गठबंधन की पहल और राजद की चुप्पी
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बराबरी के दर्जे के साथ गठबंधन की पहल की थी। उन्होंने दावा किया कि एआईएमआईएम ने केवल छह सीटें मांगी थीं, किसी मंत्री पद की मांग नहीं की थी। ओवैसी के मुताबिक, उनके बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने लालू और तेजस्वी को तीन पत्र लिखे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
मुस्लिम नेतृत्व का सवाल
ओवैसी ने राजद पर मुसलमानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यादव, कुशवाहा, पासवान, कुर्मी और मांझी जैसी हर जाति का अपना नेता है, लेकिन मुस्लिम समुदाय को कोई नेतृत्व नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सकते हैं तो सीमांचल का कोई युवा नेता क्यों नहीं बन सकता।
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ओवैसी ने यह भी साफ किया था कि गठबंधन की पहल इसलिए की गई थी ताकि एआईएमआईएम पर भाजपा की मदद करने का आरोप न लगे। उन्होंने कहा कि राजद की ओर से जवाब न आना ही यह साबित करता है कि असल में भाजपा की मदद कौन कर रहा है।