फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VHP ने कहा : कोई जाति भेद न होने का दावा करते हैं इब्राहीमी धर्म, इसलिए आरक्षण का नहीं होना चाहिए विस्तार

Sun, 16 Oct 2022 09:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

विहिप ने कहा कि वह केंद्र द्वारा नियुक्त आयोग के समक्ष परामर्श प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेगा, ताकि उसे उचित निष्कर्ष निकालने में मदद मिल सके। 
विज्ञापन
विश्व हिंदू परिषद - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) रविवार को कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) वे लोग हैं जिन्हें ऐतिहासिक रूप से उनकी जातियों के आधार पर वंचित किया गया, जबकि इब्राहीमी धर्म अपने बीच कोई जाति भेद न होने का दावा करते हैं, इसलिए आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। 

विज्ञापन


विहिप ने कहा कि वह केंद्र द्वारा नियुक्त आयोग के समक्ष परामर्श प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेगा, ताकि उसे उचित निष्कर्ष निकालने में मदद मिल सके। पूर्व सीजेआई के.जी. बालकृष्णन की अध्यक्षता में उन लोगों को एससी का दर्जा देने के लिए आयोग का गठन किया गया था, जो ऐतिहासिक रूप से एससी होने का दावा करते हैं, लेकिन वे राष्ट्रपति के आदेशों में उल्लिखित धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तित (कन्वर्ट) हो गए हैं।   

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 (समय-समय पर संशोधित) कहता है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का नहीं माना जा सकता है। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, 1950 में यह स्पष्ट करते हुए संवैधानिक आदेश जारी किया गया था कि केवल हिंदू अनुसूचित जातियों को ही आरक्षण की सुविधा मिलेगी। इसके बावजदू ईसाई मिशनरी और इस्लामी संगठन में परिवर्तित अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आरक्षण को बढ़ाने की तर्कहीन मांग निरंतर कर रहे हैं। हम अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों को नहीं छीनने देंगे। 
विज्ञापन


उन्होंने आगे कहा, धर्मांतरित अनुसूचित जाति के लोगों के लिए एसटी (अनुसूचित जनजाति) कानूनों के तहत भी आरक्षण की गारंटी के अधिकारों को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। आलोक कुमार ने कहा, डॉ. अंबेडकर और पंडित जवाहर लाल नेहरू समेत कई प्रधानमंत्रियों ने धर्मांतरित जातियों को लाभ देने की मांग को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा, पूर्व प्रधानमंत्रियों में राजीव गांधी, देवगौड़ा और मनमोहन सिंह ने इस मां को स्वीकार करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें देशव्यापी विरोध के कारण पीछे हटना पड़ा था। 

हिंदू संगठन के नेता ने कहा, 2005 मेंम सच्चर कमेटी और 2009 में रंगनाथ कमेटी ने इस संबंध में कुछ सिफारिशें की थीं, लेकिन उनके अंतर्विरोधों और गलत कार्यप्रणाली के कारण उनकी सिफारिशों को लागू नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा, ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम नेतृत्व द्वारा एकसाथ सामाजिक समानता का दावा करना और इस मांग (आरक्षण) को बड़े जोश के साथ उठाना विरोधाभासी हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें