तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार को 31 अक्तूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ था तो वह एक नवंबर को फिर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।
बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने चौबीस घंटे में हमारे सवालों का जवाब देने का वादा किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर हम राज्य के लिए मनरेगा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए धन आवंटन पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को वापस ले रहे हैं।
टीएमसी सांसद ने कहा कि मैं केंद्र सरकार को 31 अक्तूबर तक का अल्टीमेटम दे रहा हूं। अगर तब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मैं एक नवंबर से फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करूंगा।
इससे एक दिन पहले अभिषेक बनर्जी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने राज्यपाल से जारी तनातनी के बीच कहा था कि पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी राज्य सरकार का लगातार विरोध करते थे। इसके लिए उन्हें इनाम दिया गया है। इनाम के फलस्वरूप उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति बनाया गया।
क्या है मामला?
राजभवन के बाहर धरने का नेतृत्व कर रहे तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने रविवार को कथित भाजपा समर्थक आचरण के लिए राज्यपाल सीवी आनंद बोस की आलोचना की थी। उन्होंने मनरेगा के तहत राज्य की बकाया राशि के भुगतान पर संतोषजनक प्रतिक्रिया मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात भी कही।
राज्यपाल पर साधा निशाना
अभिषेक बनर्जी ने कथित तौर पर टीएमसी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करने के लिए भाजपा की निंदा की। उन्होंने कहा कि हमें पता चला है कि राज्यपाल ने राजभवन के बाहर धरने पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने धरना हटाने का आह्वान किया है। मेरा सवाल यह है कि जब भाजपा नेताओं ने राजभवन का इस्तेमाल किया तो लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए उनकी चिंता कहां थी?
राज्यपाल ने कही यह बात
इस बीच बोस ने रविवार को कहा कि वह मनरेगा के काम से वंचित लोगों से मिलेंगे और उनकी शिकायतें नई दिल्ली के समक्ष उठाएंगे। राज्यपाल ने मुख्य सचिव एचके द्विवेदी को भी पत्र लिखकर पूछा कि क्या राजभवन के बाहर टीएमसी के चल रहे धरने के लिए अनुमति दी गई थी।
धनखड़ को लेकर कही यह बात
राज्यपाल की आलोचना जारी रखते हुए बनर्जी ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़, जो अब भारत के उपराष्ट्रपति हैं, को अपने कार्यकाल के दौरान बंगाल के हितों का विरोध करने के लिए पुरस्कृत किया गया। उन्होंने कहा कि आप भाजपा के राज्यपाल नहीं हैं। आप बंगाल के राज्यपाल हैं। अतीत में सात मौकों पर भाजपा ने राजभवन तक मार्च किया था। क्या आपने तब पुलिस को कोई पत्र लिखा था?