सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी से 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगने की मांग की है। वहीं, सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दीपके के पिता की आर्थिक स्थिति, सीजेपी के कानूनी सहायता कोष और कपिल सिब्बल की एक करोड़ रुपये की सहायता की जांच की मांग की है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वह अपने अगले वीडियो संदेश में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के लिए महिला प्रदर्शनकारियों से माफी मांगें। वहीं, गुजरात के सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दीपके के पिता की आर्थिक स्थिति और सीजेपी के कानूनी सहायता कोष की जांच की मांग की है।
दीपके ने शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगला वीडियो जारी करेंगे और उसमें 20 जुलाई को हुए कथित लाठीचार्ज के लिए माफी मांगेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्राओं और नाबालिग लड़कियों के साथ मारपीट की। उनका दावा है कि कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े तक फाड़े गए और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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यह मामला 20 जुलाई को संसद मार्च से जुड़ा है। उस दिन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जारी अपने वीडियो संदेश में कहा था कि जो "भटके हुए बच्चों" ने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की थी, उन्हें वह माफ करना चाहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने सवाल उठाया था कि क्या प्रधानमंत्री केवल वीडियो संदेश में छात्रों को माफ करेंगे या उनके खिलाफ दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाएगा।
दीपके के पिता और सीजेपी के फंड की जांच की मांग
उधर, सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों को पत्र लिखकर सीजेपी के कानूनी सहायता कोष और दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। अमित तिवारी ने कहा कि दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्होंने अपने बेटे को विदेश में पढ़ाई के लिए कैसे भेजा और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी पूछा है कि यदि सीजेपी को कानूनी सहायता के लिए एक करोड़ रुपये का फंड मिला है, तो यह जांच की जाए कि क्या सीजेपी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल है या नहीं। यदि नहीं, तो राजनीतिक दल के नाम पर फंड जुटाने और उसका उपयोग करने की जांच होनी चाहिए।
कपिल सिब्बल के फंड पर भी सवाल
अमित तिवारी ने केंद्रीय जीएसटी विभाग को लिखे पत्र में यह भी मांग की है कि वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा सीजेपी के कानूनी सहायता कोष के लिए घोषित एक करोड़ रुपये के योगदान पर लागू जीएसटी नियमों की जांच की जाए। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ने सोमवार को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सीजेपी समर्थक प्रदर्शनकारियों की कानूनी मदद के लिए बनाए गए फंड में एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। फिलहाल, इन शिकायतों पर चुनाव आयोग, जीएसटी विभाग या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।