हार्वर्ड से की पीएचडी
58 वर्षीय अभिजीत ने 1988 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। निर्मला ने बताया कि गरीबी को लेकर अभिजीत की समझ शानदार थी। गरीब कैसे जीवन यापन करते हैं इसको लेकर उसने विशेष काम किया था। हमारे बीच अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर हमेशा चर्चा होती थी। अभिजीत अभी मैसाच्युसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनोलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।
अमर्त्य सेन के बाद अभिजीत ने बढ़ाया मान
प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी ने भी अभिजीत को बधाई दी। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार देबज्योति कोनार ने कहा, हमारे दोनों पूर्व छात्रों ने नोबेल जीतकर हमारा मान बढ़ाया है। अमर्त्य सेन के बाद अब अभिजीत को अर्थव्यवस्था का नोबेल हमारे संस्थान के लिए गर्व की बात है।
ममता ने दी बधाई
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को नोबेल जीतने के लिए अभिजीत बनर्जी को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, एक बार फिर नोबेल जीतकर बंगाली ने देश का मान बढ़ाया है, दिल की गहराइयों से अभिजीत को इस शानदार सफलता के लिए बधाई। ये हमारे लिए खुशी का पल है।’
जेएनयू में जश्न
पूर्व छात्र अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल मिलने पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी जश्न का माहौल है। अभिजीत को पढ़ा चुके प्रोफेसर अंजान मुखर्जी ने कहा, हमें विश्वास था कि अभिजीत की मेहनत और लगन को एक दिन बड़ा सम्मान मिलेगा। मैंने उसे ईमेल पर बधाई दी है। सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग में मैंने उसे पढ़ाया था। वह हमारे सबसे अच्छे छात्रों में से था, हमें उस पर गर्व है। मुखर्जी ने कहा, 2008 में जब उसकी किताब आई थी, हमें तब ही लगा था कि ये एक दिन नोबेल जरूर जीतेगा। अब हम गर्व से कह सकेंगे कि हमने नोबेल विजेता को पढ़ाया है।