कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को एसआईआर के खिलाफ उनके संगठन के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति से किए जाने को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके साथी सौरव दास और आशुतोष रांका खुशी-खुशी जेल गए और उन्होंने नफरत के बजाय शांति का रास्ता चुना, क्योंकि वे महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग पर चल रहे हैं।
समर्थकों को दिए एक भावुक संदेश में दिपके ने त्योहारों के दौरान समर्थकों को अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की। साथ ही उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका को याद रखने की अपील की, जो 13 अक्तूबर से जेल में हैं और अपने प्रियजनों के साथ समय नहीं बिता पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों के परिवारों को भी उनके विरोध प्रदर्शन करने के फैसले का परिणाम भुगतना पड़ रहा है।
'फ्रांस जैसी हिंसा नहीं की, खुशी-खुशी जेल गए हमारे साथी'
फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से सीजेपी के आंदोलन की तुलना करने वालों पर निशाना साधते हुए दिपके ने कहा कि जेल भेजे जाने के बावजूद संगठन के नेताओं ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। इसके बजाय उन्होंने मुस्कुराते हुए जेल जाना स्वीकार किया। उन्होंने कहा, 'थोड़ी शर्म कीजिए और देखिए कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में सौरव दास और आशुतोष खुशी-खुशी जेल गए। उन्होंने वह नहीं किया, जो फ्रांस में हो रहा है।'
दिपके ने कहा कि दोनों नेताओं को लगता है कि उन्हें गलत तरीके से जेल में रखा गया है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शांति और करुणा का रास्ता चुना है। उन्होंने उनके इस रवैये की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से करते हुए कहा कि दोनों नेता जेल में रहते हुए भी अहिंसा के सिद्धांतों पर कायम हैं।
उन्होंने कहा, 'यह कोई तुलना नहीं है। लेकिन जब महात्मा गांधी को जेल भेजा गया था, तो वह शांतिपूर्वक जेल गए थे, क्योंकि वह सत्याग्रह कर रहे थे। आशुतोष और सौरव भी उसी तरह का सत्याग्रह कर रहे हैं।' दीपके ने कहा कि गिरफ्तारियों से आंदोलन के कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दास और रांका जेल से उसी मुस्कान के साथ बाहर आएंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
सीजेपी और उसके समर्थक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। दास और रांका को 13 अक्तूबर को सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इससे एक दिन पहले ही जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। दोनों नेताओं को शुरुआत में पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसे 19 अक्तूबर को दो दिन के लिए और बढ़ा दिया गया।
'हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं, खुद नफरत का शिकार नहीं बनना'
दिपके ने समर्थकों को आगाह किया कि दोनों नेताओं के साथ हुए व्यवहार के चलते वे अपने भीतर नफरत की भावना पैदा न होने दें। उन्होंने कहा कि करुणा ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, 'हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं। हम उन लोगों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिनके मन में नफरत के अलावा कुछ नहीं है। लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नफरत हमारे भीतर जगह न बना ले।' उन्होंने जोर देकर कहा, 'हमें वैसा नहीं बनना है, जिससे हम नफरत करते हैं।'
दीपके ने आंदोलन का विरोध करने वालों पर आरोप लगाया कि वे कार्यकर्ताओं को उकसाकर उन्हें शांतिपूर्ण रास्ते से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि गिरफ्तारियों के कारण आंदोलन पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने समर्थकों से अपना और अपने परिवारों का ध्यान रखने की अपील की। दीपके ने कहा, 'हम पीछे नहीं हटेंगे। ऐसा नहीं है कि सौरव और आशु के जेल जाने से हम डर जाएंगे।'