फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Politics: दिल्ली चुनाव नतीजे से तय होगा INDIA ब्लॉक का भविष्य, राहुल बनाम केजरीवाल जंग से विपक्ष की तकरार बढ़ी

सार

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान 5 फरवरी को होंगे। नतीजों की घोषणा 8 फरवरी को होनी है। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस आमने-सामने की लड़ाई लड़ रहे हैं, इससे विपक्षी दलों के गठबंधन- INDIA ब्लॉक का भविष्य अधर में लटक गया है। माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस का प्रदर्शन नहीं सुधरा तो INDIA ब्लॉक का नेतृत्व करने का उसका दावा कमजोर पड़ सकता है।
विज्ञापन
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लोकसभा चुनाव के बाद अस्तित्व पर उठ रहे सवालों के बीच विपक्ष के इंडी गठबंधन का भविष्य दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद तय हो जाएगा। गठबंधन के नेतृत्व के सवाल पर पहले से जारी खींचतान के बीच दिल्ली चुनाव में आप और कांग्रेस का एक-दूसरे के खिलाफ खम ठोंकने व सपा, शिवसेना के साथ टीएमसी का आप के पक्ष में खड़ा होने से टकराव बढ़ गया है।

विज्ञापन


वहीं, चुनाव प्रचार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच सोमवार को पहली बार शुरू हुई तीखी जुबानी जंग ने गठबंधन में तकरार को और बढ़ा दिया है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया है।

गठबंधन के नेतृत्व के मुद्दे पर शुरू हुई यह लड़ाई अब गठबंधन के अस्तित्व का सवाल बन गई है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की गठबंधन के नेतृत्व की इच्छा जताने के बाद सपा, शिवसेना यूबीटी, राजद और एनसीपी (शरद) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला था। अब दिल्ली चुनाव के दौरान गठबंधन के अस्तित्व को लेकर कई क्षेत्रीय दल अलग-अलग बयान दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने जहां गठबंधन को खत्म करने की वकालत की, वहीं राजद के तेजस्वी यादव ने कहा कि यह गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए था।
विज्ञापन


गठबंधन के लिए यह चुनाव इसलिए अहम
नतीजे कुछ भी आएं विपक्षी गठबंधन में तकरार बढ़ना निश्चित है। अगर आप सत्ता बचाने में कामयाब रही तो क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस पर गठबंधन का नेतृत्व छोडने का दबाव और बढ़ेगा। अगर आप सत्ता बरकरार नहीं रख पाई तो आप और उसके साथ खड़े दल कांग्रेस पर भाजपा के लिए राज्य में सत्ता की राह खोलने का आरोप लगाएंगे। चूंकी आप का जन्म कांग्रेस के मूल वोट बैंक की कीमत पर हुआ है। ऐसे में कांग्रेस जितना मजबूत होगी, आप उतनी ही कमजोर होगी।

कांग्रेस के लिए चुनौती बन रही आप
दरअसल, कांग्रेस के लिए आप बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसने पहले दिल्ली में और फिर पंजाब में कांग्रेस से उसके ही वोट बैंक के सहारे सत्ता छिनी। जिस गुजरात में 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने 43 फीसदी वोट के साथ 77 सीटें जीतीं, वहीं 2022 के चुनाव में उसका मतप्रतिशत गिरकर 28 फीसदी और सीटें महज 17 पर आ गईं। इस चुनाव में आप ने 13 प्रतिशत वोट और पांच सीटें हासिल की थीं।

ये है दिल्ली का गणित
2013 में आप के उदय से पहले कांग्रेस को हर चुनाव में 40 से 48 फीसदी, भाजपा को 32 से 38 फीसदी वोट मिलते रहे हैं। 1998 में सत्ता गंवाने से ले कर अब तक भाजपा का मूल वोट बैंक उसके साथ रहा है। कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिर कर 24.6 पर आ गया है। 2013 के बाद 2015 और 2020 के चुनावों में उसे क्रमश: 9.7 और 4.6 प्रतिशत वोट मिले। दूसरी ओर आप को 2013 में 29.5 फीसदी तो बीते दो चुनावों में क्रमश: 54.3 व 53.57 फीसदी वोट मिले।

स्थानीय चुनावों के लिए गठबंधन नहीं : शरद
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एससीपी) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि इंडिया गठबंधन का ध्यान केवल राष्ट्रीय स्तर के चुनावों पर है। राज्य या स्थानीय स्तर के चुनावों के मुद्दे पर गठबंधन में चर्चा भी नहीं हुई है। शरद पवार का यह बयान शिव सेना यूबीटी नेता संजय राउत की इस घोषणा के बाद आया है कि उनकी पार्टी मुंबई और नागपुर में आगामी नगर निगम चुनाव अकेले लड़ेगी। पवार ने कहा-दिल्ली में आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को समर्थन है। 
विज्ञापन


संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें