भाजपा के लिए दिल्ली का किला जीतना अब तक अबूझ पहेली बना हुआ है, लेकिन भाजपा नेताओं को लगता है कि अब वह अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में घेरने में कामयाब हो पाएंगे। एक्साइज पॉलिसी में हुआ घोटाला, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की ईडी जांच और शिक्षा क्षेत्र में हुई अनियमितता उसका हथियार बन सकती हैं। सीएजी की रिपोर्ट में कथित तौर पर 31,724 करोड़ रुपये की अनियमितता होने की बात सामने आई है। भाजपा इन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाकर जनता के बीच अरविंद केजरीवाल की उसी छवि पर हमला करने की रणनीति बना रही है, जिसके दम पर वे अब तक अपनी राजनीति करते आए हैं।
आम आदमी पार्टी स्वयं यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार उसके प्रमुख नेताओं को विभिन्न मामलों में फंसाने की कोशिश कर सकती है। उसका आरोप रहा है कि अब तक आप के कई विधायकों को अलग-अलग मामलों में फंसाने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक किसी पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाया और सभी कोर्ट से बरी हुए। यह साबित करता है कि भाजपा की नीयत उसके प्रति साफ नहीं है। उसका आरोप है कि यह सब केवल उसके बढ़ते राजनीतिक कदम को रोकने की नीयत से किया जा रहा है।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार मामला इतना सीधा नहीं है। सत्येंद्र जैन के करीबी लोगों के पास से बरामद हुई भारी रकम उन्हें लंबे समय तक परेशान कर सकती है। दिल्ली सरकार के द्वारा स्कूलों के निर्माण में उपयोग में लाई गई सामग्री की सरकार के द्वारा चुकाई गई कीमत उन्हीं वस्तुओं की खुले बाजार में कीमतों में कई गुना अंतर है। इससे मनीष सिसोदिया भी घिर सकते हैं जिसका जवाब देना केजरीवाल के लिए भारी पड़ सकता है।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने अमर उजाला को बताया कि वे समाज के सभी वर्गों तक सदैव पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं, आगे भी लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते रहेंगे। लेकिन अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में हुआ भ्रष्टाचार उनका सबसे प्रमुख मुद्दा रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएजी की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में 31,724 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इस जांच रिपोर्ट को अब तक आप सरकार लोगों के सामने रखने से बचने की कोशिश करती रही है, लेकिन अपने कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक यह सच पहुंचाएंगे।