गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के भरूच लोकसभा उम्मीदवार चैतर वसावा को जमानत की शर्त को निलंबित करके अंतरिम राहत दी। बता दें कि उन्हें 2023 के दंगा मामले में मुकदमे के समापन तक नर्मदा जिले की सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया था। यह देखते हुए कि चुनाव लड़ना भारत के नागरिक के रूप में आवेदक का वैधानिक अधिकार है, न्यायमूर्ति एम आर मेंगडे ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 12 जून तक वसावा को अंतरिम राहत दी।
बता दें कि वसावा ने सत्र अदालत द्वारा लगाई गई जमानत की शर्त से छूट की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। नर्मदा जिले के कुछ हिस्से भरूच लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जहां से वसावा 7 मई को होने वाले चुनाव के लिए आप के उम्मीदवार हैं।
आप नेता ने कहा कि चूंकि वह भरूच लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार हैं, इसलिए सत्र अदालत द्वारा लगाई गई शर्त ने उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव लड़ने के उनके वैधानिक अधिकार से वंचित कर दिया।
रिकॉर्ड से, ऐसा प्रतीत होता है कि एक पंजीकृत राजनीतिक दल ने वर्तमान आवेदक को भरूच निर्वाचन क्षेत्र के आगामी संसदीय चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार नामित किया है। चुनाव लड़ना भारत का नागरिक होने के नाते आवेदक का वैधानिक अधिकार है, ताकि वर्तमान आवेदक को अंतरिम राहत के माध्यम से आगामी चुनाव लड़ने में सक्षम बनाया जा सके। उपरोक्त शर्तों को सुनवाई की अगली तारीख तक निलंबित करने का आदेश दिया जाता है।
दरअसल, नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा की एक सत्र अदालत ने 22 जनवरी को, दंगा मामले में वसावा को इस शर्त पर जमानत दी थी कि लंबित मुकदमे के दौरान, वह नर्मदा और भरूच जिलों की सीमा से बाहर रहेंगे और अपने पते और मोबाइल नंबर के संबंध में विवरण प्रस्तुत करेंगे।