कांग्रेस पार्टी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के लिए जो मापदंड बनाया है, अब वह उससे बाहर जाती नहीं दिख रही है। पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़ में गठबंधन के लिए कांग्रेस पार्टी ने स्थानीय निकाय के चुनावों में मिले वोटों को गठबंधन का प्रमुख आधार बनाया है। अगर इस आधार को देखें तो तीनों ही जगह पर आम आदमी पार्टी गठबंधन के मापदंड में फिट नहीं बैठती। पंजाब में आप ने कुछ सीटों पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ा था, लेकिन अधिकांश सीटों पर उसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा में आप ने अभी तक स्थानीय निकाय का चुनाव ही नहीं लड़ा है। चंडीगढ़ में भी यही हालत है। इस फार्मूले के हिसाब से गठबंधन की संभावना केवल दिल्ली में है, क्योंकि यहां पर दोनों ही पार्टियों ने स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ा है।
भले ही कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों पार्टियों के नेता अब अपने बयानों में तीखापन लाने लगे हैं। खासतौर से, सोमवार को राहुल गांधी का यह ट्वीट आने के बाद।
राहुल ने ट्वीट कर लिखा था, 'कांग्रेस और आप के गठबंधन का मतलब है भाजपा का सफाया, यह सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी को दिल्ली की चार सीटें देने को तैयार है, लेकिन केजरीवाल ने फिर यू टर्न ले लिया। हमारे दरवाजे अब भी खुले हैं, लेकिन समय बीतता जा रहा है।' इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने साफतौर पर कह दिया है कि वे दिल्ली के अलावा आप के साथ किसी अन्य सीट पर गठबंधन नहीं करेंगे।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का कहना है कि हमने दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन और सीटों का निर्धारण करने के लिए स्थानीय निकाय के चुनावों का मापदंड तैयार किया था। पिछली बार स्थानीय निकाय चुनावों में जिस पार्टी को जितने वोट मिले हैं, उसी के हिसाब से लोकसभा सीटों का बंटवारा कर लिया जाए।
जैसे दिल्ली में आप को स्थानीय निकाय चुनावों में जितने वोट मिले थे, उसी आधार पर कांग्रेस, आप को लोकसभा की चार सीटें देने को तैयार हैं। इन चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 21 था तो आप का 26 या 27 फीसदी रहा है।
कांग्रेस का कंधा पकड़ कर खड़ा होने का प्रयास कर रही है आम आदमी पार्टी
कांग्रेस पार्टी के नेता का कहना है कि दिल्ली से बाहर आम आदमी पार्टी कांग्रेस की मदद से खड़ा होने का प्रयास कर रही है। दिल्ली में गठबंधन के लिए जो आधार तय किया गया है, वही आधार दूसरे राज्यों में भी माना जाएगा। आप ने पंजाब में स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ा था, नतीजा सबके सामने है।
हरियाणा में अभी आप ने वह चुनाव लड़ा ही नहीं है। चंडीगढ़ में भी यही हाल है। इन जगहों पर आप को कैसे सीट दे दें। दरअसल, आप का मकसद बहुत साफ है। वह गठबंधन की आड़ में खुद को हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में खड़ा करने के प्रयासों में लगी है।
केजरीवाल तो यू-टर्न के लिए जाने जाते हैं
पवन खेड़ा का कहना है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल यू-टर्न के लिए जाने जाते हैं। वे लुका-छिपी के खेल में भी माहिर हैं। हमें कई लोग बताते हैं कि आप किसकी बी टीम है। पिछले चुनाव में वे कह रहे थे कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में अरविंद। कई लोगों ने हमें अरविंद केजरीवाल की इस राजनीति के बारे में बताया था।
बता दें कि केजरीवाल ने राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा था, 'कौन सा यू-टर्न, अभी तो बातचीत चल रही थी। आपका ट्वीट दिखाता है कि गठबंधन आपकी इच्छा नहीं मात्र दिखावा है। मुझे दुःख है आप बयानबाजी कर रहे हैं। आज देश को मोदी-शाह के खतरे से बचाना अहम है। दुर्भाग्य कि आप यूपी और अन्य राज्यों में भी मोदी विरोधी वोट बांट कर मोदी की मदद कर रहे हैं।'