सरकार महिला सशक्तीकरण पर जोर देकर आधी आबादी को खुश करने का प्रयास कर रही है। यह आशा की जा रही थी कि सरकार महिलाओं के लिए खजाना खोलेगी लेकिन बजट में महिलाओं खासकर महिला सुरक्षा को अनदेखा किया गया है।
दुर्भाग्य की बात है कि बजट में महिला सशक्तीकरण की बात कहीं नहीं दिख रही। महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में बढ़ोतरी नहीं की गई। टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाने, कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाकर लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई। महिलाओं के लिए ईपीएफ की सीमा को 8 फीसदी किया गया है। इससे और सेनिटेशन पर आए बजट से शायद महिलाओं को थोड़ा लाभ मिले।
- डॉ रंजना कुमारी, निदेशक सेंटर फॉर सोशल रिसर्च
महिला सुरक्षा की बात नहीं की गई
देश में महिलाओं की आधी आबादी है लेकिन बजट में इनका ध्यान नहीं रखा गया। जब बच्चियों व महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, तब भी बजट में महिला सुरक्षा की बात न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सेस लगा दिया गया है।
सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के बजट में खास बढ़ोतरी नहीं की गई। निर्भया फंड के लिए भी कुछ खास नहीं किया गया। खास से महिलाओं व बच्चों को सेफ्टी दी जा सकेगी। इस बजट ने काफी हताश ही किया है।
- स्वाति जयहिंद, अध्यक्ष दिल्ली महिला आयोग