26 नवंबर को 'आम आदमी पार्टी' की स्थापना के 12 साल पूरे हो गए हैं। दिल्ली और पंजाब में 'आप' की सरकार है। दिसंबर 2013 में जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा तो इसके खाते में 70 में से 28 सीटें आई थीं। दिल्ली के अलावा देश की सियासत में भी काफी हलचल हुई। अन्ना आंदोलन से निकली इस पार्टी की देश-विदेश में खूब चर्चा हुई। 'आम आदमी पार्टी', आखिर यह नाम कैसे पड़ा। सबसे पहले ये नाम, किसके दिमाग में आया था। इसके पीछे एक बड़ा रोचक किस्सा है। जब इस आंदोलन से जुड़ों लोगों ने पार्टी का नाम रखने पर चर्चा की। तो अरविंद केजरीवाल की ओर से इस पार्टी का नाम 'आम आदमी पार्टी' रखने की सुझाव दिया गया था।
कैसे पड़ा दल का नाम आम आदमी पार्टी?
अन्ना आंदोलन खत्म होने के बाद यह तय हो गया था कि अब राजनीतिक दल बनाकर आगे बढ़ा जाएगा। इसके लिए माथापच्ची शुरू हो गई। सभी लोग इस बात पर चर्चा करने लगे कि राजनीतिक पार्टी का नाम क्या होगा। अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास जैसे कई चेहरे इस उधेड़बुन में जुट गए। योगेंद्र यादव चाहते थे कि पार्टी का नाम कुछ ऐसा हो, जिसमें स्वराज शब्द आ जाए। केजरीवाल और कुछ अन्य साथी चाहते थे कि दूसरी पार्टियों की तर्ज पर कोई नाम न हो। कुछ ऐसा खोजना होगा, जो आम लोगों को अपील करे। इस बाबत कई दिनों तक गहन विचार विमर्श चलता रहा। इसके बाद 2012 में केजरीवाल ने पार्टी का नाम 'आम आदमी पार्टी' रखने सा सुझाव दिया।
पार्टी की राजनीतिक सफर
बता दें कि 2013 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा का पहला चुनाव लड़ा था। 70 सीटों वाली विधानसभा में आप, दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। आप ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने आप को बाहर से समर्थन दिया तो दिल्ली में आप की सरकार बन गई। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि 49 दिन बाद केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में 'आप' ने प्रचंड जीत हासिल की। तब आप को 70 में से 67 सीटें मिलीं थी। इसके बाद 2020 के चुनाव में आप ने 70 में से 62 सीटें जीत लीं। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 117 सीटों में से 92 सीटें जीतीं। गोवा की विधानसभा में भी आप को दो सीटें मिलीं। लोकसभा और राज्यसभा में भी आप की हिस्सेदारी हो गई। गत वर्ष भारतीय निर्वाचन आयोग ने आप को राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा दे दिया। उस वक्त निर्वाचन आयोग ने देश के कई पुराने राजनीतिक दलों, जिनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल थे, उनसे राष्ट्रीय दल होने का दर्जा वापस ले लिया था।
दिल्ली से शुरू हुई पार्टी का कई राज्यों में विस्तार
दिल्ली से शुरू हुई आम आदमी पार्टी का विस्तार पांच राज्यों में हुआ है। मौजूदा समय में भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अलावा आम आदमी पार्टी भी राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर जानी जाती है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली और पंजाब में सरकारें हैं। इसके अलावा गुजरात, जम्मू-कश्मीर और गोवा में भी पार्टी की एंट्री हो चुकी है।
पार्टी की वो योजनाएं जो लोगों के बीच हुई लोकप्रिय
- आम आदमी पार्टी ने जनता के लिए कई योजनाएं शुरू की। इन योजनाओं में मोहल्ला क्लिनिक, मुफ्त बिजली, महिलाओं की मुफ्त में बस यात्रा और पेंशन शामिल हैं।
- मोहल्ला क्लिनिक- जनता को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहल्ला क्लिनिक योजना को लॉन्च किया। इससे लोगों को मुफ्त इलाज घर के पास में ही मिलने लगा।
- महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा- महिलाओं के लिए बस यात्रा फ्री करने की गई है। आप का दावा है कि इससे लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचा।
- मुफ्त बिजली- इस योजना के तहत 200 यूनिट तक बिजली माफ कर दी गई है।
- पेंशन- इस योजना में बुजुर्गों को पेंशन के रूप में 2500 रुपये दिए जाते हैं।