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सरकारी सब्सिडी के लिए अनिवार्य होगा आधार कार्ड

Sat, 12 Mar 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मनी बिल के रूप में दी आधार बिल को मंजूरी
  • राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटा सकता है विपक्ष
  • विपक्ष ने सरकार पर राज्यसभा को निष्क्रिय करने का आरोप
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- फोटो : PTI
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विस्तार
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सरकारी सब्सिडी या सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए आधार कार्ड अब अनिवार्य हो जाएगा। विपक्ष के एकजुट विरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने लोकसभा में शुक्रवार को आधार बिल को मनी बिल केरूप में पारित करा लिया है। मनी बिल होने के कारण इसे राज्यसभा में पारित कराया जाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे में इस बिल के लोकसभा में पारित होते ही देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड के आधार ही सरकार की ओर से सेवा उपलब्ध कराने को कानूनी मान्यता मिलनी तय है।
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इसे मनी बिल के रूप में पेश किए जाने का विपक्ष की ओर से तीखा विरोध हुआ। विपक्ष ने इसे सरकार की राज्यसभा को निष्क्रिय करने की साजिश करार देते हुए राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाने का संकेत दिया। इसके अलावा कई विपक्षी दलों ने इस बिल के प्रावधानों के कारण नागरिकों की निजता के उल्लंघन का खतरा उत्पन्न होने की आशंका जाहिर की। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकारी योजनाओं को उचित लोगों तक पहुंचाने, भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बिल जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि आधार का डाटा नागरिक की सहमति के बिना और बायोमैट्रिक डाटा नागरिकों की सहमति के बाजवूद साझा नहीं की जाएगी।
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राज्यसभा में पारित कराया जाना जरूरी नहीं

- फोटो : PTI

लोकसभा में आधार बिल को मनी बिल के रूप में पेश किए जाने पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इससे स्थाई समिति को भेजने की मांग की। कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह राज्यसभा को निष्क्रिय करने की साजिश है। बीजेडी के भर्तृहरि मेहताब ने नागरिकों की निजता के उल्लंघन की आशंका जताई और कहा कि सरकार को हड़बड़ी नहीं दिखानी चाहिए। इसके जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि यह यूपीए सरकार की योजना है। अब तक 97 फीसदी वयस्क लोगों ने आधार कार्ड बनवा लिए हैं।

इसके अलावा प्रतिदिन 7 लाख लोग इसे बनवा रहे हैं। वित्त मंत्री ने इसकेजरिए भ्रष्टाचार रोके जाने का हवाला देते हुए कहा कि आधार कार्ड को रसोई गैस ग्राहकों से जोड़े जाने के कारण केंद्र को 15000 करोड़ रुपये की बचत हुई। कई राज्य इसके जरिए सफलतापूर्वक जन वितरण प्रणाली की सब्सिडी दे कर 2300 करोड़ रुपये बचाए हैं। वित्त मंत्री ने जोर दे कर कहा कि इस बिल से सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों को हासिल हो पाएगा।

मनी बिल होने केकारण इस बिल की राज्यसभा से मंजूरी अनिवार्य नहीं है। राज्यसभा अब इस बिल पर महज चर्चा कर सकती है। वह भी उसे एक निश्चित अवधि के दौरान ही इस पर चर्चा करनी होगी। ऐसे में अब इस बिल के समक्ष कोई अड़चन नहीं है।
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