संसद ने गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कामकाज में पारदर्शिता लाने वाले बिल को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया। बिल में एनजीओ के रजिस्ट्रेशन के लिए पदाधिकारियों का आधार नंबर देना अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है। लोकसभा ने सोमवार को बिल को मंजूरी दी थी। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा, यह बिल किसी एनजीओ के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता बरकरार रखने को लाया गया है। यह संशोधन उन एनजीओ के हित में है, जो देश में अच्छा काम करना चाहते हैं। लेकिन जिन एनजीओ के काम में पारदर्शिता नहीं है, उन्हें जरूरत दिक्कत होगी। यह बिल एनजीओ और पारदर्शिता के हित में है।
गृह राज्यमंत्री ने कहा, बिल में विदेश से फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ के प्रशासनिक खर्च की सीमा को 50 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी किया गया है ताकि जो राशि जिस काम के लिए मिली है, उसी में खर्च की जाए। बिल में केंद्र सरकार को एनजीओ को एफसीआरए सर्टिफिकेट सरेंडर करने के अनुमति देने में सक्षम बनाने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के विदेश से धन प्राप्त करने पर रोक लगाने की अनुमति देता है।
देश की सुरक्षा के लिए बिल लाना जरूरी था
राय ने कहा, देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए यह बिल लाना आवश्यक था। पहले कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एनजीओ ने विदेशों से मिलने फंड का खुलासा नहीं किया और न ही अपने खर्चों का लेखाजोखा भी पेश नहीं किया। पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने सदन को बताया था कि एनजीओ को विदेश से 20 हजार करोड़ का फंड मिला, लेकिन किसी को नहीं पता कि इसमें से 10 हजार करोड़ कहां गए।
एसबीआई में खाता खुलवाना अनिवार्य
कुछ सांसदों ने विदेश से फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ के लिए दिल्ली के एसबीआई में खाता खोलने को अनिवार्य करने पर सवाल उठाने पर राय ने कहा, सरकार ने एसबीआई को इसलिए चुना है, क्योंकि देश के हर हिस्से में इसकी शाखाएं हैं। एनजीओ को खाता खोलने के लिए दिल्ली आने की आवश्यकता नही हैं, वह अपनी नजदीकी शाखा से आवेदन कर सकते हैं।