प्रसून जोशी ने सुषमा स्वराज को सुनाई गयी आखिरी कविता 'उखड़े उखड़े क्यों हो वृक्ष सुख जाओगे' भी सुनाई। पद्मश्री, भजन सम्राट अनूप जलोटा ने कार्यक्रम की शुरुआत सुषमा जी के पसंदीदा गीत 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' से की और कहा कि मेरी कई बार सुषमा जी से भेंट हुई और हर बार उनसे मिलकर मैं प्रभावित होता था। वे एक बहुत ही स्पष्ट वक्ता थीं और हम कलाकारों के लिए भी उनके ह्रदय में विशेष स्थान था।
इस मौके पर सुषमा स्वराज की पुत्री बांसुरी स्वराज ने उन्हें याद करते हुए उनके बारे में कई बातें बताईं। उन्होंने बताया कि मां कृष्ण की उपासक थीं, उनका मानना था कि कृष्ण जी ने जो भी कार्य किए उसमे खुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने जीवन में इसी उपदेश का अनुसरण किया। उन्होंने जो भी महकमा संभाला उसमे जनकल्याण के लिए बड़े से बड़े फैसले लिए। इसके अलावा मां को फिल्म देखना और गाने गाना बेहद पसंद था।
पद्मश्री, फिल्म निर्देशक, मधुर भंडारकर ने कहा मुझे सुषमा स्वराज जी से कई बार मिलने और बात करने का मौका मिला। वर्ष 2003 में मेरी फिल्म ‘आन: मेन एट वर्क’ के मुहूर्त पर वे खासतौर पर दिल्ली से मुंबई आई थीं। सुषमा जब भी मिलती थी तो हमेशा मुझे मेरी फिल्मों के लिए प्रोत्साहित करती थी, मेरी फिल्म देखकर मुझे फोन करके अपनी राय देती थीं।
संगीत निर्देशक कुलदीप सिंह ने 18 अप्रैल 2011 को सुषमा स्वराज द्वारा उनको लिखा गया पत्र पढ़ कर सुनाया। उस पत्र में सुषमा जी ने मुझे आश्वासन दिया था कि 'कॉपीराइट बेंच' जब भी संसद में प्रस्तुत किया जाएगा उस समय हमारी पार्टी बिल को पूरा समर्थन देकर पारित करवाएगी और आप जैसे कलाकारों को न्याय दिलाने की कोशिश में अहम भूमिका निभाएगी। सुषमा जी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि बिल तो पारित हो गया परन्तु आज अगर वो हमारे बीच में होती तो हमारे ऊपर आज जो अन्याय हो रहे हैं, उसके मुकाबले स्थिति और बेहतर होती।
पद्मश्री, गीतकार प्रसून जोशी जी ने कहा कि कॉपीराइट संशोधन बिल में सुषमा जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। सुषमा स्वराज जी के मन में 'जीवन के प्रति काव्य दृष्टि थी', वे कविताओं की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं और मेरी लिखी हुई कविताएँ उन्हें काफी पसंद आती थी। उनकी सोच को हमेशा याद रखेंगे।
पद्मश्री, अभिनेत्री कंगना रणावत ने सुषमा स्वराज को याद करते हुए कहा कि सुषमा ने अपने जीवन में कई बहादुरी भरे काम किए। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को अंडरवर्ल्ड के हाथों से बचाया और एक पहचान दी, वे मेरे लिए प्रेरणा स्वरुप हैं। उनकी पूरी ज़िन्दगी महिला सशक्तिकरण की मिसाल है जिसे हमारी आने वाली पीढ़ियां कभी भुला नहीं सकती।
इनके अलावा उत्कृष्ट गायिका कविता कृष्णामूर्ति ने सुषमा स्वराज को 'तू मेरा कर्मा, तू मेरा धर्मा' गीत समर्पित किया और कार्यक्रम का समापन किया।