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एबीवीपी के विरोध पर तमिलनाडु के एक विवि ने पाठ्यक्रम से हटाई अरुंधति की किताब

Fri, 13 Nov 2020 03:07 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।
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अरुंधति रॉय
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तमिलनाडु में एक सरकारी विश्वविद्यालय ने अपने एमए अंग्रेजी के पाठ्यक्रम से वामपंथी लेखिका अरुंधति रॉय की किताब ‘वॉकिंग विद द कामरेड्स’ को हटा दिया है।

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माओवादियों पर लिखी गई किताब को हटाने का निर्णय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) समेत कई अन्य की शिकायत के बाद लिया गया। इन सभी का आरोप था कि इस किताब में विद्रोहियों का महिमा मंडन किया गया है और इसकी सामग्री देश विरोधी हैं।


तिरुनेलवेल्ली स्थित मनोमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय (एमएसयू) से संबद्ध कॉलेजों में यह किताब 2017-18 में एमए अंग्रेजी साहित्य के छात्रों के लिए तीसरे सेमेस्टर में जोड़ी गई थी। एमएसयू के कुलपति के. पिच्चूमणि ने कहा, पिछले सप्ताह हमें एबीवीपी की तरफ से लिखित शिकायत मिली थी। बाद में बहुत सारे अन्य लोगों ने भी इस किताब को लेकर शिकायत की।
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साथ ही हमें हमारे सिंडिकेट सदस्यों की तरफ से भी शिकायतें मिलीं। उन्होंने कहा, इन शिकायतों में किताब में विवादित सामग्री होने की जानकारी दी गई थी और वे इसे छात्रों के लिए पाठ्यक्रम से हटवाना चाहते थे।

कुलपति के मुताबिक, इसके बाद वरिष्ठ विद्वानों की एक समिति को यह मामला सौंपा गया था। इस पाठ्यक्रम को तैयार करने वाले बोर्ड ऑफ स्टडीज के पूर्व व वर्तमान चेयरमैन भी इस समिति का हिस्सा थे।

उन्होंने कहा, समिति ने बुधवार को बैठक की और इस किताब की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए इसे पाठ्यक्रम से हटाने का निर्णय लिया। इस किताब के स्थान पर पद्मश्री एम. कृष्णन की ‘माई नेटिव लैंड, एसै ऑन नेचर’ को पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कुलपति ने कहा, इस निर्णय को विश्वविद्यालय की स्टैंडिंग कमेटी ऑफ एकेडमिक अफेयर्स में मंजूर कराया जाएगा।

विपक्ष ने किया विरोध तो भाजपा उतरी समर्थन में
विपक्षी दलों द्रमुक व भाकपा (माले) ने राज्य सरकार के इस कदम का विरोध किया है। लेकिन भाजपा ने एबीवीपी की मांग का समर्थन किया है। द्रमुक की महिला विंग की सचिव और सांसद कनिमोझी ने एक ट्वीट में कहा, सत्ता और राजनीति के ‘कला क्या है, साहित्य क्या है और छात्रों को क्या पढ़ना चाहिए’ पर निर्णय लेने से समाज की बहुलवादी विशेषता नष्ट हो जाएगी।

भाकपा (माले) के सांसद एस. वेंकटसेन ने ट्वीट में कहा, किताब को हटाया जाना निंदा योग्य है और चाहता हूं कि यह कदम वापस लिया जाए। तमिलनाडु प्रगतिवादी लेखक व कलाकार संघ के महासचिव अधावन धीतचैन्या ने भी किताब को पाठ्यक्रम से हटाए जाने की निंदा की है।
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भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानती श्रीनिवासन ने एबीवीपी का समर्थन किया और कहा कि यह केवल एक संगठन नहीं था, जिसने अरुंधति रॉय की किताब को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की थी।

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