केरल के कोझिकोड शहर के एक निजी अस्पताल में ढाई साल की अफगानी बच्ची की जान बचाने के लिए दुर्लभ अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) किया गया। यह बच्ची व उसके परिजन जीवन की एक नई आस लेकर भारत आए हैं।
इतनी छोटी बच्ची का पहली बार प्रत्यारोपण
एस्टर एमआईएमएस अस्पताल के अधिकारियों ने शनिवार को कोझिकोड में संवाददाताओं को बताया कि केरल के किसी भी अस्पताल में यह पहला मौका है जब अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण सर्जरी कुलसुम जैसी इतनी छोटी लड़की पर सफलतापूर्वक की गई है।
दुबई में चार बार हुई कीमोथेरेपी
हाल ही में जांच में पता चला था कि कुलसुम को जन्म से ही माइलॉयड ल्यूकेमिया (खून एवं अस्थ मज्जा का एक प्रकार का कैंसर) है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि बच्ची की दुबई में चार चक्र की कीमोथेरेपी हुई और डॉक्टरों ने यथाशीघ्र उसका अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण कराने का सुझाव दिया। चूंकि यह मेडिकल सुविधा दुबई में नहीं थी, इसलिए कुलसुम का परिवार केरल आया और उसने केरल के एस्टर एमआईएमएस में उपचार का अनुरोध किया।
कई कानूनी मुश्किलों के बाद हुई सर्जरी
कुलसुम और उसके परिवार को इस उपचार से पूर्व कई कानूनी मुश्किलों से गुजरना पड़ा। उसका परिवार अफगानिस्तान से था लेकिन उसके दादा-दादी दशकों पहले व्यापारिक उद्देश्यों से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे क्योंकि वे तब अपने देश के पासपोर्ट पर यात्रा नहीं कर सकते थे। कुलसुम के पता मोहम्मद का जन्म संयुक्त अरब अमीरात में हुआ और उनके पास भी पाकिस्तानी पासपोर्ट था। उन्हें पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत में इलाज कराने के मार्ग में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा।
आखिरकार एस्टर अस्पताल समूह के अध्यक्ष डॉ. आजाद मूपेन ने एस्टर एमआईएमएस, उत्तरी केरल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सभी कानूनी मुश्किलों का निराकरण करने तथा कुलसुम के उपचार एवं उनकी भारत यात्रा का मार्ग प्रशस्त का निर्देश दिया।