घरों में ही प्राथमिक उपचार
स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ वैभव खन्ना कहते हैं कि यह दौर चिकित्सकीय सुविधाओं को और अपडेट करने का है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार प्राथमिक उपचार केंद्रों पर पहले से तय सुविधाएं हैं उन्हें मजूबत बनाएं। साथ ही जो अस्पताल ऑक्सीजन और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं वाले हैं उन्हें ज्यादा बेहतर और मजबूत करने की आवश्यकता है।
डॉ. वैभव खन्ना कहते हैं कि उन्होंने देश के अलग-अलग राज्यों में अस्पतालों के माध्यम से यह जानने की कोशिश की कि क्या प्राथमिक सुविधाओं वाले अस्पताल मरीजों को ज्यादा बेहतर इलाज दे पा रहे हैं या L2 जैसी सुविधाओं वाले अस्पताल। डॉ. खन्ना के मुताबिक उन्हें देश के सभी राज्यों से मिली जानकारी से पता चला कि बेसिक सुविधाओं वाले अस्पतालों से ज्यादा लोगों ने अब अपने मरीजों को घरों में प्राथमिक उपचार देना मुफीद समझा है। केंद्र सरकार भी और राज्य सरकार भी कोविड के मरीजों को होम आइसोलेशन की ही सलाह दे रही है। डॉ. वैभव खन्ना कहते हैं कि ऐसी दशाओं में जो लोग होम आइसोलेशन में हैं वह लोग एक तरीके से प्राथमिक उपचार वाले बालों की भांति अपने घर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डॉ. वैभव खन्ना
- फोटो : Amar Ujala
50,000 से ज्यादा घरों में सर्वेक्षण
डॉक्टर वैभव खन्ना और उनकी टीम के नेटवर्क ने देश के अलग-अलग राज्यों में 50,000 से ज्यादा घरों का सर्वेक्षण कराया। इस सर्वेक्षण के दौरान पता चला 95 फ़ीसदी से ज्यादा घरों में इस वक्त प्राथमिक उपचार के तौर पर दवाओं से लेकर अन्य जरूरी चिकित्सकीय उपकरण और चिकित्सकीय सुविधाएं मौजूद थीं। उनकी टीम ने यह भी जाना कि क्या इन घरों में पहले से इतने चिकित्सकीय उपकरण और चिकित्सकीय संसाधन मौजूद थे तो पता चला सिर्फ 50 फीसदी घरों में ही फर्स्ट एड किट बॉक्स होता था। जबकि कोविड काल में इन लोगों ने अपने घरों में 'प्राथमिक उपचार केंद्र' के तौर पर सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध करवा लिए।
डॉ. वैभव खन्ना और उनके संगठन के चिकित्सकों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस बाबत एक पत्र भी लिखा है कि ऐसी दशाओं में अब बड़े अस्पतालों को और ज्यादा मजबूत करने की आवश्यकता है। डॉ. वैभव के मुताबिक ज्यादातर सरकारों ने कोविड केयर सेंटर में भी L1 अस्पताल के बराबर ही सुविधाएं रखी हैं। वह कहते हैं कि देश के सभी राज्यों को अगर देखेंगे तो उनके पास वेंटिलेटर युक्त अस्पतालों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में वेंटिलेटर और अन्य ज़रूरी जीवन रक्षक उपकरणों वाले अस्पताल की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए।