एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में एटीएम की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई है। लेकिन इससे कैश क्रंच का कोई लेना-देना नहीं है बल्कि ये देश के डिजिटलाइज्ड होने का संकेत है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल देश भर में जितने एटीएम थे उसमें हजार से ज्यादा एटीएम अब हटा दिए गए हैं। क्योंकि लोगों ने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ई-बैंकिंग शुरू कर दिया है।
भाजपा सरकार के लिए ये संकेत उत्साहित करने वाले हैं क्योंकि पीएम मोदी का यही सपना है कि वो देश में डिजिटल क्रांति लाएं। बहरहाल सरकार के लिए अच्छे संकेतों के बीच लोगों के लिए कई मुसीबतें भी दिख रही हैं। जिन एटीएम की मौजूदगी, ये आंकड़े देशभर में दिखा रहे हैं उनमें कैश की कमी से जनता त्रस्त है। खबर है कि कई राज्यों में एटीएम खाली पड़े हैं। ऐसे में एटीएम से लेकर देश की आर्थिक प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राफिक रिपोर्ट में आप देख सकते हैं किस तरह से महीने दर महीने एटीएम हटाने का काम चलता रहा और पिछले साल के मुकाबले इस साल फरवरी तक एटीएम की संख्या में कैसे गिरावट दर्ज की गई। लगातार गिरते एटीएम की संख्या में पिछले साल दिसंबर कुछ उतार-चढ़ाव का दौर लेकर आया जिसके बाद फिर एक बार घटते एटीएम दर्ज किए गए।
इन हालातों से क्या वाकई ये समझा जा सकता है कि लोगों ने ई-बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन शुरू कर दिया है या फिर एटीएम की घटी संख्या के पीछे उसका रख-रखाव एक कारण है। वैसे अगर वाकई लोगों में डिजिटल रुझान बढ़ा है तो आशा की जा सकती है कि आने वाले दिनों में एटीएम की संख्या देशभर में और कम हो जाएगी।